आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में दो पंडितों और अपनी पत्नी की गोली मारकर हत्या करने वाले मुख्य आरोपी अरविंद सिंह के बेटे की मौत के मामले में पुलिस ने स्थिति साफ कर दी है. पुलिस मुख्यालय (DGP HQ) द्वारा साझा की गई जानकारी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने दावा किया है कि बच्चे की मौत पुलिस की गोली से नहीं, बल्कि आरोपी अरविंद सिंह की ही .32 बोर की रिवॉल्वर से हुई थी. गौरतलब है कि आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद मार गिराया था.
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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के 3 सबसे बड़े तथ्य
डीजीपी मुख्यालय की ओर से जारी विवरण के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के तथ्य यह बताते हैं कि बच्चे को गोली आरोपी अरविंद की ही रिवॉल्वर से लगी थी.
1. ब्लैकनिंग और टैटूइंग (बहुत पास से गोली लगना): बच्चे के 'एंट्री वुंड' (गोली घुसने के निशान) पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉचिंग मौजूद है. यह स्थिति केवल 'वेरी क्लोज रेंज' यानी 1 फुट से भी कम दूरी से गोली मारने पर ही संभव है. पुलिस की क्रॉस फायरिंग के दौरान बच्चा कम से कम 8 से 10 फीट दूर था. इतनी दूरी से गोली लगने पर एंट्री वुंड पर यह निशान संभव ही नहीं हैं. पुलिस आरोपी को न्यूट्रलाइज करने से पहले बच्चों के इतने नजदीक नहीं पहुंच सकती थी, क्योंकि पुलिस कमरे के एक छोर पर थी और आरोपी बच्चों के साथ दूसरे छोर पर था. पुलिस आरोपी को न्यूट्रलाइज करने के बाद ही बच्चों तक पहुंच पाई थी.
2. गोली की ट्रैजेक्टरी (दिशा): बच्चे के शरीर में गोली की 'ट्रैजेक्टरी' यह सिद्ध करती है कि गोली उसके शरीर में नीचे से तिरछे ऊपर की तरफ गई है. इतने कम हाइट के बच्चे में इस दिशा में गोली तभी लग सकती है जब उसके चेहरे की हाइट से नीचे से बैरल करके गोली चलाई जाए. यह संकेत देता है कि गोली मारते समय बच्चा आरोपी की गोद में या पकड़ में इस प्रकार रहा होगा कि नजदीक से इस तरह गोली मारी गई जिससे यह ट्रैजेक्टरी संभव हो सकी.
3. घाव का साइज (.32 बोर बनाम 9mm): बच्चे के एंट्री वुंड का साइज .32 बोर की रिवाल्वर से मेल खाता है जो आरोपी अरविंद द्वारा इस्तेमाल की गई थी. 9mm पिस्टल (जो पुलिस द्वारा इस्तेमाल होती है) के एंट्री वुंड का साइज .32 बोर की तुलना में बड़ा होता है.
मानसिक स्थिति और परिजनों को दी जा रही धमकियां
पुलिस के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी पत्नी का मर्डर कर सकता है ऐसे में उसकी अपने बेटे की हत्या करने की संभावना बनती है. समझाने-बुझाने के दौरान भी अरविंद द्वारा अपनी मां, चाचा, भतीजियों और बहनों को धमकियां दी जा रही थीं कि वह बच्चों को गोली मार देगा.
10 साल की चश्मदीद बच्ची का बयान
घटनाक्रम की सबसे बड़ी चश्मदीद साक्षी अरविंद की 10 साल की बच्ची है, जिसे आरोपी ने बंधक बनाकर शील्ड (ढाल) की तरह इस्तेमाल किया था. पुलिस ने इस बच्ची को सकुशल रेस्क्यू करके बाहर निकाला था. पुलिस का दावा है कि उस बच्ची ने खुद बताया है कि उसके पिता ने ही अपने बेटे को गोली मारी थी.
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