कानपुर के चर्चित कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में कल्यानपुर पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे इस मर्डर मिस्ट्री से जुड़े कई रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं. शुरुआत में जिस कत्ल का शक कारोबारी की बहू शालू पर जताया जा रहा था उस केस में तब सबसे बड़ा सनसनीखेज मोड़ आ गया जब बेटे विशाल ने खुद पुलिस के सामने आकर सरेंडर कर दिया और पिता की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.
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विशाल ने बहू शालू को बेकसूर बताते हुए पुलिस के सामने पूरी साजिश का सच उगल दिया है. पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं बल्कि 40 लाख रुपये के कर्ज के दलदल, क्रेडिट कार्ड के खेल, दुकान से चोरी और जायदाद हाथ से निकल जाने के डर से बुनी गई एक खौफनाक साजिश थी.
5 सितंबर की रात का खौफनाक प्लान
पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी बेटे ने बताया कि उसने अपने साथी राज किशोर के साथ मिलकर 5 सितंबर की रात को ही हत्या का खाका खींच लिया था. आरोपी ने घर की चाबी से एक डुप्लीकेट चाबी बनवाई थी. 5 सितंबर की रात जब परिवार बाहर निकलने वाला था तब साथी को डुप्लीकेट चाबी से अंदर घुसकर कमरे में छिपने को कहा गया था. योजना के मुताबिक, जब कारोबारी विनीत मिनोचा खाना खाकर सो गए तो एक आरोपी ने उनके पैर पकड़े और दूसरे ने तकिए से मुंह दबाकर उनकी हत्या कर दी.
पुलिस और आरोपी के बीच हुए सवाल-जवाब
पुलिस द्वारा की गई सख्त पूछताछ में आरोपी ने हत्या की वजह और अपने वित्तीय संकट को लेकर कई चौंकाने वाली बातें कबूल कीं.
सवाल: अपने पिता की हत्या क्यों कराना चाहते थे?
जवाब: 'पिताजी लूज कैरेक्टर के आदमी थे. उनके कई औरतों के साथ अवैध संबंध थे. हमें डर था कि कहीं वह किसी और महिला को घर न ले आएं या कोई और दांव न पच जाए. हमें यह भी चिंता सता रही थी कि कहीं इस वजह से हमारी संपत्ति हाथ से न निकल जाए.'
सवाल: तुम्हारे ऊपर कुल कितना कर्जा है?
जवाब: 'सब मिलाकर लगभग 40 लाख रुपये के आसपास का कर्ज चढ़ चुका था.'
सवाल: महीने में किश्त कितनी जाती थी और पिता खर्च के लिए कितना देते थे?
जवाब: 'महीने की लगभग 55,000 से 56,000 रुपये की किश्त जाती थी. जबकि पिताजी खर्च के लिए हर महीने केवल 40,000 रुपये ही देते थे.'
सवाल: किश्त के लिए बाकी पैसे कहां से लाते थे?
जवाब: 'लोन चुकाने के लिए नया लोन लेते थे या क्रेडिट कार्ड स्वाइप करते थे. इसके अलावा अपनी ही दुकान से सामान चोरी करवाकर पार कराते थे. मैं दुकान के अंदर से माल बाहर पहुंचा देता था या साथी को अंदर भेजकर चोरी करवाता था.'
कर्ज का दलदल और खूनी साजिश
पूछताछ में हुए इन खुलासों से साफ है कि आरोपी बेटा कर्ज के चक्रव्यूह में बुरी तरह उलझ चुका था. 55-56 हजार की भारी-भरकम ईएमआई और पिता से मिलने वाले 40 हजार के पॉकेट मनी के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए वह नए-नए लोन लेने, क्रेडिट कार्ड स्वाइप करने और अपनी ही दुकान में चोरी करने जैसी हरकतों में लिप्त था. कर्ज से मुक्ति पाने और पिता की जायदाद पर अपना मालिकाना हक सुरक्षित करने के लिए ही उसने अपने साथी के साथ मिलकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया.
फिलहाल कल्यानपुर थाना पुलिस ने आरोपी बेटे और उसके साथी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.
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