Raebareli News: देश को रोशनी देने वाली एनटीपीसी परियोजना की छांव में काम करने वाले 24 से ज्यादा मजदूरों के घरों में अंधेरा पसर गया है. एक निजी कंपनी के 'अड़ियल' रुख के कारण पसीना बहाने वाले कामगार अब अपनी ही गाढ़ी कमाई के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. बुधवार को जब सब्र का बांध टूटा, तो पीड़ित मजदूरों ने कोतवाली कूच किया और पुलिस से न्याय की गुहार लगाई.
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उम्मीदों पर फिरा पानी, सड़कों पर आए कामगार
पसीना बहाकर विकास की इबारत लिखने वाले संतोष मिश्रा, राधेश्याम, राजकुमार और विनोद कुमार की आंखों में आज बेबसी और गुस्सा साफ झलक रहा था. मजदूरों का आरोप है कि उन्होंने कंपनी के लिए दिन-रात मेहनत की, ताकि उनके घर का चूल्हा जल सके. लेकिन कंपनी प्रबंधन की नियत में ऐसा खोट आया कि एक महीने 9 दिन का वेतन ही रोक लिया गया. हद तो तब हो गई जब मजदूरों ने अपना वह हक मांगा, जो बीते दो सालों से 'बोनस' के नाम पर फाइल में दबा हुआ है.
'साहब! बच्चों की फीस कहाँ से भरें?'
ऊंचाहार कोतवाली पहुंचे मजदूरों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि कंपनी के चक्कर काट-काटकर उनके जूते घिस गए हैं. अमरेश कुमार ने बताया कि जब भी वेतन मांगा जाता है, कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी टालमटोल कर उन्हें गेट से बाहर का रास्ता दिखा देते हैं.
एनटीपीसी परिसर में सुलग रहा है असंतोष
एनटीपीसी परियोजना के भीतर ठेका कंपनियों द्वारा मजदूरों का शोषण कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मामला दो साल के बोनस और वेतन से जुड़ा होने के कारण तूल पकड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला बड़े आंदोलन की शक्ल ले सकता है.
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
ऊंचाहार कोतवाल अजय कुमार राय ने बताया कि मजदूरों का मामला संज्ञान में आया है. किसी भी सूरत में श्रम कानूनों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. तहरीर के आधार पर कंपनी प्रबंधन को जवाब-तलब किया जाएगा और सुनिश्चित किया जाएगा कि मजदूरों को उनकी पाई-पाई का भुगतान हो. मामला दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
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