Raebareli News: नौनिहालों की सुरक्षा को लेकर अब प्रशासन ने 'तीसरी आंख' खोल ली है. जिले की सड़कों पर दौड़ रही स्कूली बसों और वैन की फिटनेस में अगर जरा भी झोल मिला, तो न केवल गाड़ी सीज होगी बल्कि स्कूल प्रबंधन की शामत भी आएगी. शासन के निर्देश पर जिले में विशेष अभियान शुरू हो गया है, जिसके तहत 15 अप्रैल तक हर हाल में स्कूली वाहनों का पूरा ब्योरा यूपी इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मैनेजमेंट पोर्टल (UP-ISVMP) पर अपलोड करना होगा.
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पोर्टल पर खुलेगी 'पोल', अब नहीं चलेगा जुगाड़
अक्सर देखा जाता है कि कागजों में फिट दिखने वाली बसें हकीकत में 'कबाड़' होती हैं. इसी खेल को खत्म करने के लिए एआरटीओ (प्रवर्तन) उमेश कटियार ने सख्त रुख अपनाया है. अब तक 30 स्कूलों के 75 वाहनों ने अपना पंजीकरण करा लिया है, लेकिन बाकी अभी भी 'सुस्ती' दिखा रहे हैं. साफ कर दिया गया है कि पोर्टल पर गाड़ी का इंजन, चेसिस नंबर, जीपीएस ट्रैकिंग और सीसीटीवी तक की जानकारी देनी होगी.
100 रुपये का स्टाम्प... और जवाबदेही तय
स्कूल प्रबंधन को महज खानापूर्ति से राहत नहीं मिलेगी. उन्हें 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी शपथ पत्र देना होगा. इसमें साफ तौर पर यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि उनके वाहन और चालक मानकों पर खरे हैं. अगर बाद में कोई गड़बड़ी मिली, तो स्कूल प्रबंधन यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकेगा कि उन्हें जानकारी नहीं थी.
सुरक्षा तंत्र: बैठकों से कसी जाएगी लगाम
बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दो स्तरीय समितियों का गठन किया गया है. जिसमें पहली जिला स्तरीय समिति है.इस समिति में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी साल में दो बार समीक्षा करेंगे.वहीं दूसरी विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति है जिसमें प्रत्येक स्कूल को अपनी समिति बनानी होगी जो साल में चार बार सुरक्षा मानकों की पड़ताल करेगी.
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