Raebareli GST Controversy: रायबरेली के जनपद में जीएसटी विभाग के सचल दल की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.किसान का आरोप है कि वैध बिल होने के बावजूद न केवल उसकी गाड़ी रोकी गई बल्कि मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर सिपाही उसे बीच रास्ते में छोड़कर गाड़ी लेकर रफूचक्कर हो गए. इस उत्पीड़न से आक्रोशित किसान और भाजपा नेता सोमवार रात जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए.
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क्या है पूरा मामला?
उन्नाव बॉर्डर स्थित लोरामऊ निवासी किसान अखिलेश तिवारी ने बताया कि वह लालगंज से पशुओं के लिए भूसा रखने हेतु करीब 25 टीन शेड और पाइप खरीदकर अपने घर जा रहे थे. उनके पास खरीदारी से संबंधित सभी पक्के बिल मौजूद थे. इसी दौरान गुरबख्श गंज और सहजौरा के बीच जीएसटी सचल दल की कमिश्नर सलोनी भारद्वाज ने उनकी माल लदी गाड़ी को रोक लिया.
'पानी लेने गया और सिपाही गाड़ी लेकर भाग निकले'
पीड़ित किसान के मुताबिक, जब कमिश्नर ने बिल मांगा तो उन्होंने बताया कि बिल पीछे बाइक से आ रहे उनके भाई सुरेश के पास है. आरोप है कि सचल दल की अधिकारी ने एक न सुनी और गाड़ी को रायबरेली स्थित जीएसटी कार्यालय ले जाने का आदेश दे दिया. रास्ते में जब किसान ने प्यास लगने पर पानी की बोतल लेने के लिए सिपाही से गाड़ी रोकने का अनुरोध किया, तो सिपाही ने चालाकी दिखाई. जैसे ही किसान वाहन से नीचे उतरा, सिपाही गाड़ी को तेज रफ्तार में भगा ले गया.
बीजेपी नेता के साथ कलेक्ट्रेट पर दिया धरना
अखिलेश तिवारी जैसे-तैसे अपने भाई के साथ बाइक से जीएसटी कार्यालय पहुंचे. लेकिन वहां तीन-चार घंटे बीत जाने के बाद भी किसी ने उनकी फरियाद नहीं सुनी. मजबूर होकर उन्होंने अपनी व्यथा भाजपा नेता संतोष पांडे को बताई. भाजपा नेता ने जब इस संबंध में जीएसटी कमिश्नर सलोनी भारद्वाज से फोन पर बात की, तो उन्हें भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. विभाग के इस अड़ियल और तानाशाही रवैये से नाराज होकर भाजपा नेता और बड़ी संख्या में लोग किसान के समर्थन में कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठ गए.
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