Raebareli Mandi Bhav 16th july 2026: मानसून की दस्तक और बदलते मौसम के बीच जिले में महंगाई ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है. शहर की नवीन फल और सब्जी मंडी में थोक भाव नियंत्रण में होने के बावजूद फुटकर बाजार में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं. बिचौलियों और फुटकर दुकानदारों की साठगांठ के चलते उपभोक्ताओं को सब्जियों के लिए 15 से 20 फीसदी तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है. हालत यह है कि मंडी से निकलकर मोहल्लों की दुकानों तक पहुंचते-पहुंचते सब्जियों के दाम दोगुने से भी ज्यादा हो जा रहे हैं.
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लोकल आवक पूरी तरह ठप, बाहरी राज्यों पर निर्भर
मंडी के प्रमुख व्यापारियों का कहना है कि जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाली स्थानीय आवक पूरी तरह बंद हो चुकी है, इसके चलते अब रायबरेली पूरी तरह से बाहरी राज्यों की सप्लाई पर निर्भर हो गया है. वर्तमान में मंडियों की स्थिति यह है कि टमाटर बंगलूरू और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों से आ रहा है. प्याज महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की मंडियों से लोड होकर पहुंच रहा है, अदरक कर्नाटक से और हरी मिर्च रामपुर से मंगाई जा रही है.
दूरी बढ़ने से बढ़ा भाड़ा
व्यापारियों के मुताबिक, सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके आने वाले ट्रकों का परिवहन खर्च (भाड़ा) काफी बढ़ गया है, जिसकी वसूली अंततः आम जनता की जेब से हो रही है.
फुटकर दुकानदारों का तर्क: 'रास्ते में सड़ रहा माल'
जब इस भारी अंतर को लेकर फुटकर दुकानदारों से बात की गई, तो उन्होंने अपना दर्द रोया, दुकानदारों का तर्क है कि बारिश के मौसम में दूर से आने वाला टमाटर और मिर्च मंडियों में ही सड़ने लगता है. वहां से छांटकर जब वे माल लाते हैं, तो उन्हें लोकल ठेले का किराया और सड़ने वाले माल का नुकसान भी जोड़ना पड़ता है.
उधर, आम उपभोक्ताओं का कहना है कि प्रशासन को फुटकर दामों पर लगाम कसने के लिए औचक निरीक्षण करना चाहिए, ताकि आपदा के इस समय में जमाखोरी और मनमानी मुनाफाखोरी पर रोक लग सके.
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