Raebareli Weather Update: रायबरेली में इंद्रदेव की बेरुखी से अन्नदाता परेशान, उमस और बिजली की आंख-मिचौली से जनता बेहाल

Newzo

• 09:41 AM • 16 Jul 2026

Raebareli Rain News: आषाढ़ बीतने को है, लेकिन रायबरेली में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बारिश के इंतजार में धान की रोपाई प्रभावित हो रही है, जबकि महंगे डीजल से सिंचाई करने की मजबूरी खेती की लागत बढ़ा रही है. दूसरी ओर उमस और बिजली कटौती ने आम लोगों का जीवन भी बेहाल कर दिया है

 रायबरेली में इंद्रदेव की बेरुखी से अन्नदाता परेशान, उमस और बिजली की आंख-मिचौली से जनता बेहाल

रायबरेली में इंद्रदेव की बेरुखी से अन्नदाता परेशान, उमस और बिजली की आंख-मिचौली से जनता बेहाल

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Raebareli Rain News: जनपद में इस बार मानसून की बेरुखी ने आम जनमानस से लेकर अन्नदाताओं तक की कमर तोड़ कर रख दी है. आषाढ़ बीतने को है, लेकिन बादलों की बेरुखी के चलते क्षेत्र में बारिश न होने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. सुबह से ही आसमान से बरसती आग और हवा में घुली चिपचिपी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. 

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​कूलर-पंखे भी हुए फेल, बिजली कटौती ने बढ़ाई आफत

मौसम के तल्ख तेवरों के आगे घर में लगे पंखे और कूलर भी पूरी तरह हांफ चुके हैं. उनसे निकलने वाली गर्म हवा राहत देने के बजाय बेचैनी और बढ़ा रही है. दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है. रही-सही कसर बिजली विभाग की आंख-मिचौली पूरी कर दे रही है. अघोषित बिजली कटौती और ट्रिपिंग के कारण लोग रात-रात भर सोने को तरस रहे हैं. उमस भरी इस गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. 

​डीजल के भरोसे अन्नदाता, जेब पर बढ़ा अतिरिक्त बोझ

उधर, बारिश न होने से सबसे बड़ा संकट क्षेत्र के अन्नदाताओं पर आन पड़ा है. खरीफ की मुख्य फसल धान की रोपाई का समय तेजी से निकला जा रहा है. इंद्रदेव को मनाने के तमाम जतन करने के बाद भी जब आसमान में बादल नहीं रीझे, तो किसानों को मजबूरन महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है. 

​किसानों ने बयां किया अपना दर्द

बारिश की उम्मीद में कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें? अब महंगे दामों पर डीजल खरीदकर निजी पंपिंग सेटों से खेतों की भराई और धान की रोपाई करनी पड़ रही है. इससे खेती की लागत दोगुनी हो गई है और जेब पर भारी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है. ​यदि अगले कुछ दिनों में झमाझम बारिश नहीं हुई, तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा. 

फिलहाल, आसमान में छिटपुट बादलों की आवाजाही तो हो रही है, लेकिन पुरवा हवाओं के साथ बढ़ती उमस सिर्फ लोगों को तपा रही है, बरसने का नाम नहीं ले रही.