Raebareli Mandi Bhav Update: रायबरेली में मुनाफाखोर बेलगाम, महंगाई की आड़ में खुली लूट, दाल से लेकर सब्जी तक के दाम आसमान पर

Newzo

• 09:45 AM • 14 Jul 2026

Raebareli Mandi Bhav 14th July 2026: रायबरेली में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. दाल, सब्जी, तेल, दूध और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. मुनाफाखोरी और जमाखोरी के आरोपों के बीच प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है.

 रायबरेली में मुनाफाखोर बेलगाम, महंगाई की आड़ में खुली लूट, दाल से लेकर सब्जी तक के दाम आसमान पर

रायबरेली में मुनाफाखोर बेलगाम, महंगाई की आड़ में खुली लूट, दाल से लेकर सब्जी तक के दाम आसमान पर

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Raebareli Mandi Bhav 14th July 2026: मध्यपूर्व की जंग और भारी बारिश के कारण उपजे हालात की आड़ में रायबरेली के बाजारों में मुनाफाखोरों ने खुली लूट मचा रखी है. सब्जी, दूध, दही और राशन से लेकर होटल-रेस्टोरेंट तक में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं, किसी नियामक संस्था की पैनी नजर न होने का फायदा उठाकर मुनाफाखोर बेलगाम हो चुके हैं. इस बीच प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है.

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थाली से दूर हुई दाल और सब्जी, 30 से 40 फीसदी तक बढ़ी कीमते

​स्थानीय मंडियों और खुदरा बाजारों में थोक सामान और फुटकर सामान के दामों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है. अपवाद छोड़ दें तो थोक मंडी से निकलकर ग्राहक की रसोई तक पहुंचते-पहुंचते सामान 30 से 40 फीसदी तक महंगा हो जा रहा है. सबसे बदतर स्थिति रोजमर्रा की सब्जियों की है, जहां फुटकर बिक्री में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है. पहले 5 से 10 रुपये किलो बिकने वाला आलू अब फुटकर में 15 से 20 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. टमाटर के तेवर भी लाल हैं, जो 30 से सीधे 60 से 70 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया है. व्यापारियों का तर्क है कि लगातार बारिश और परिवहन बाधित होने से आवक प्रभावित हुई है.

तेल-मसालों से लेकर दूध तक लगी महंगाई की आग

​ऊंचाहार समेत जिले के तमाम बाजारों में डीजल-पेट्रोल की आड़ लेकर ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा बढ़ा दिया है, जिसका सीधा ठीकरा उपभोक्ताओं के सिर फोड़ा जा रहा है. बाजार में बिना बिल के कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और कई जगहों पर एमआरपी से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं. पहले 80 रुपए से लेकर 100 रुपए तक बिकने वाली दाल थोक में तीस किलो की बोरी दुकानदार को 3300 रुपए में मिल रही है. दुकानदार इसे एक सौ बीस रूपये प्रति किलो के हिसाब से बेचते हैं. वहीं चीनी 50 किलो की बोरी बाइस सौ चालीस की दुकानदार खरीदने की बात कह रहा है। वही फुटकर में 45 रुपए किलो के हिसाब से बिक रही है. जबकि पूर्व में चालीस रुपए प्रति किलो में बिक रही थी. आटा पहले तीस रुपए में बिक रहा था. मौजूदा समय में 32रुपए किलो बिक रहा है. रिफाइंड पहले 120 में बिक रहा था. अब वही रिफाइंड 150 में बेचा जा रहा है. सरसों का तेल 170 रुपए में बिक रहा है. मौजूदा समय 185 रुपए में बेचा जा रहा है. दूध आधा किलो का पैकेट पहले 33रुपए में बिक रहा था. अब तीन रूपये की बढ़ोत्तरी के बाद 36रुपए में बिक रहा है. 

मिलावट का दोहरा वार, खानापूर्ति साबित हो रहे प्रशासनिक अभियान

एक तरफ जहां महंगाई आम जनता की कमर तोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ किराना बाजारों में मिलावटखोरी का धंधा भी चरम पर पहुंच गया है. मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हुए घटिया आटा और नकली मसाले बेचे जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले जांच अभियान महज खानापूर्ति और फाइलों तक ही सीमित रहते हैं, जिससे इन मिलावटखोरों और जमाखोरों के हौसले बुलंद हैं.

जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कमलेश कुमार पांडे ने बताया कि 28 आवश्यक वस्तुओं के दामों को विभाग लगातार शासन के पोर्टल पर अपलोड कर रहा है. कहीं भी जमाखोरी या अधिक रेट पर सामान बेचने की शिकायत मिली या जांच में इसकी पुष्टि हुई, तो दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी.