Raebareli News: अगर आप भी डग्गामार वाहनों की छत पर लटककर या जीपों में 'भेड़-बकरी' की तरह ठुंसकर सफर करने को मजबूर थे तो अब चैन की सांस लीजिए. मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना ने ग्रामीणों की किस्मत के ताले खोल दिए हैं. सोमवार को डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने जिले के 8 नहीं, बल्कि पूरे 9 रूटों पर प्राइवेट बसों के संचालन का 'ग्रीन सिग्नल' दे दिया है.
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सिर्फ ₹1500 में 'लाइसेंस टू राइड'
सरकार ने बस मालिकों के लिए भी 'लॉटरी' लगा दी है. बस ऑपरेटरों को बस चलाने के बदले परिवहन निगम में हर महीने केवल 1500 रुपये का मामूली शुल्क जमा करना होगा. आवेदनों की लंबी कतार में से 10 धुरंधरों ने दांव लगाया था, जिनमें से रूटों की जरूरत को देखते हुए डीएम ने परमिट की फाइल पर फाइनल मुहर लगा दी है.
इन रास्तों पर अब नहीं होगी 'धक्का-मुक्की'
प्रशासन ने उन इलाकों को चुना है जहां लोग सालों से सरकारी बस के दर्शन को तरस रहे थे. देखिए आपके इलाके का नाम सूची में है या नहीं.
दलीपुर से भोजपुर और सरेनी से रायबरेली तक का सफर होगा सुहाना.
परशदेपुर से सलोन और बनी से छतोह वाले अब सीधे पहुंचेंगे शहर.
महाराजगंज-खीरों-सतांंव रूट पर खत्म होगा सवारी का संकट.
सलोन, डीह और परशदेपुर की जनता को मिला नया 'सवारी विकल्प'.
बेड़ारू से शिवगढ़ और करीली दमा से डलमऊ के बीच अब समय पर पहुंचेंगे दफ्तर और बाजार.
छात्रों और व्यापारियों की तो 'निकल पड़ी'
ग्रामीण इलाकों के वो छात्र जो बस न होने की वजह से कॉलेज की पहली क्लास छोड़ देते थे या वो व्यापारी जिन्हें सामान लाने के लिए पूरी रात जागनी पड़ती थी. उनके लिए यह खबर किसी दिवाली गिफ्ट से कम नहीं है. एआरएम दिनेश चंद्र श्रीवास्तव ने साफ किया है कि यह तो बस शुरुआत है, आने वाले दिनों में जिले का कोई भी कोना परिवहन सेवा से अछूता नहीं रहेगा.
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