Raebareli Viral Video: सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करने वाला एक चौंकाने वाला मामला डलमऊ तहसील क्षेत्र से सामने आया है। यहां बच्चों की शिक्षा और पोषण के लिए बनाए गए सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र पर कथित रूप से एक ग्रामीण ने वर्षों से अवैध कब्जा कर रखा है.
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हैरानी की बात यह है कि भवन को निजी गोदाम और तबेले की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
बच्चों की जगह भूसा और कंडों का कब्जा
मामला डलमऊ तहसील के ग्राम सभा जगतपुर बरदरा का बताया जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार, लाखों रुपये की लागत से बने आंगनबाड़ी केंद्र का उद्देश्य गांव के बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा और पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराना था. लेकिन लंबे समय से यह भवन एक स्थानीय व्यक्ति के कब्जे में है.
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि जहां बच्चों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां भूसा भरा हुआ है। परिसर और दीवारों का इस्तेमाल उपले (कंडे) पाथने के लिए किया जा रहा है. कमरों में जलाऊ लकड़ी और घरेलू सामान रखा गया है, जिससे पूरा भवन कबाड़घर में तब्दील नजर आ रहा है.
सालों से चलता रहा कब्जा, जिम्मेदार बेखबर
ग्रामीणों का कहना है कि यह अवैध कब्जा कोई हालिया मामला नहीं, बल्कि वर्षों पुराना है. इसके बावजूद बाल विकास परियोजना (ICDS) विभाग, संबंधित सुपरवाइजर और स्थानीय प्रशासन ने कभी गंभीर कार्रवाई नहीं की.
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सरकारी व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के दावों के बीच यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है.
इस घटना के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं
आखिर वर्षों से सरकारी भवन पर कब्जा कैसे बना रहा?
क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी?
क्या स्थानीय स्तर पर किसी की मौन सहमति से यह सब चलता रहा?
वीडियो वायरल होने के बाद क्या वास्तविक कार्रवाई होगी या मामला जांच तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है. अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि डलमऊ तहसील प्रशासन और बाल विकास विभाग अवैध कब्जा हटाकर बच्चों को उनका अधिकार वापस दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं.
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