Raebareli Murder Case: रायबरेली कोर्ट का बड़ा फैसला, खेत में गाय जाने पर युवक की पीट-पीटकर हत्या करने वाले दो भाइयों को आजीवन कारावास...

Raebareli Crime Case: रायबरेली में खेत में गाय जाने के मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया था. छह साल पुराने इस सनसनीखेज हत्याकांड में विशेष एससी-एसटी अदालत ने दो भाइयों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने दोनों पर भारी जुर्माना लगाकर समाज को सख्त संदेश भी दिया है.

Raebareli Murder Case

Newzo

22 May 2026 (अपडेटेड: 22 May 2026, 01:14 PM)

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Raebareli Crime Case: रायबरेली जिले में एक अदद मवेशी का खेत में चले जाना किसी की जान की कीमत से बड़ा कैसे हो सकता है? लेकिन नफरत और गुस्से के उन्माद में अंधी हो चुकी दो जिंदगियों ने ऐसा ही किया. रायबरेली की विशेष एससी-एसटी अदालत ने एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने और जातिसूचक अपमान के सनसनीखेज मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए आखिरी सांस तक जेल की सलाखों के पीछे (आजीवन कारावास) रहने की सजा सुनाई है.

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यह पूरा खूनी घटनाक्रम आज से करीब 6 साल पहले, 27 अप्रैल 2020 को शुरू हुआ था. भदोखर इलाके के बेलाखारा गांव में उस दिन हालात सामान्य थे, तभी अचानक गांव के रामनरेश के बेटे रामशंकर की गाय चरते हुए सिद्धार्थ और प्रमोद वाजपेयी के खेत में चली गई. बस, इतनी सी बात पर दोनों भाई आगबबूला हो गए.

लाठी-डंडों से लैस होकर आए आरोपियों ने रामशंकर को घेर लिया. पहले उसे जातिसूचक गालियां दी गईं और जब उसने विरोध किया, तो उस पर तब तक डंडे बरसाए गए जब तक वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर नहीं गया.
रामशंकर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया. मामूली विवाद चंद मिनटों में हत्या की वारदात में बदल चुका था.

सरकारी वकील की दलीलें और 7 गवाहों की गवाही

मुकदमे की रोंगटे खड़ी कर देने वाली सुनवाई विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत में हुई. सरकारी अधिवक्ता अर्चना दीक्षित ने अदालत के सामने अभियोजन का पक्ष इतनी मजबूती से रखा कि बचाव पक्ष के पास कोई रास्ता नहीं बचा. कोर्ट मोहर्रिर संतुलन द्विवेदी और दीपांशु के सहयोग से पुलिस ने पुख्ता सबूत कोर्ट के सामने रखे. मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने 7 चश्मदीद गवाह पेश किए, जिनकी गवाही ने आरोपियों के गुनाह पर अंतिम मुहर लगा दी.

अदालत का कड़ा संदेश: जेल की सलाखें और भारी जुर्माना

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों के बयानों को परखने के बाद विशेष जज ने सिद्धार्थ वाजपेयी और प्रमोद वाजपेयी को गैर-इरादतन हत्या और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं के तहत दोषी पाया. कोर्ट ने न सिर्फ दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई, बल्कि समाज में एक कड़ा संदेश देने के लिए दोनों पर 1.20-1.20 लाख रुपये (कुल 2 लाख 40 हजार रुपये) का अर्थदंड भी ठोक दिया. जुर्माना न भरने पर सजा और बढ़ सकती है.

इस फैसले के बाद कोर्ट परिसर में सन्नाटा पसर गया, वहीं पीड़ित परिवार को 6 साल लंबे इंतजार के बाद आखिरकार न्याय मिल गया.