नीट पेपर लीक के विरोध में 25 जुलाई को प्रयागराज के सिविल लाइंस में हुए बवाल और तोड़फोड़ के मामले में बड़ा मोड़ आ गया है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस पर प्रदर्शनकारी छात्रों को बिना नंबर की गाड़ियों में उठाकर ले जाने और केंद्र सरकार के वादों को धोखाधड़ी करार देने का आरोप लगाया था.
ADVERTISEMENT
हालांकि इस पर प्रयागराज पुलिस ने त्वरित सफाई जारी करते हुए अखिलेश यादव के दावों को खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि जिन 10 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है वे छात्र नहीं बल्कि प्रोटेस्ट का माहौल खराब करने आए बाहरी उपद्रवी और असामाजिक तत्व थे.
अखिलेश यादव का आरोप
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रयागराज का एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें सिविल ड्रेस में कुछ लोग युवाओं को घसीटकर बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ी में बैठाते दिख रहे थे. अखिलेश यादव ने पोस्ट में लिखा 'प्रयागराज प्रोटेस्ट के नाम पर बहुत सारे छात्रों को यूपी पुलिस की विशेष टीम बिना नंबर की गाड़ी में उठाकर ले गई है. जब केंद्र सरकार ने वादा किया था कि किसी भी छात्र के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होगी तो फिर ऐसी धोखाधड़ी किसके कहने पर हो रही है? क्या यूपी पुलिस प्रधानमंत्री के वादे को जुमला साबित करना चाहती है? उठाए गए छात्रों की तुरंत रिहाई हो और माननीय न्यायालय इस पर तत्काल संज्ञान ले.'
पुलिस का पलटवार
अखिलेश यादव के आरोपों और वीडियो के वायरल होने के बाद प्रयागराज पुलिस ने पूरा घटनाक्रम साफ किया. पुलिस के मुताबिक 25 जुलाई को नीट पेपर लीक विरोध के दौरान उपद्रवियों ने सड़क पर खड़ी गाड़ियों और बीजेपी कार्यकर्ताओं के वाहनों में तोड़फोड़ की थी. घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार किए गए लोगों का पढ़ाई-लिखाई या छात्र आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था. पकड़े गए लोगों में ओयो होटल संचालक, होटल का सफाईकर्मी, फल-सब्जी विक्रेता, दूध विक्रेता और एक थाने का हिस्ट्रीशीटर शामिल है. आरोपियों का कोई शैक्षणिक बैकग्राउंड नहीं मिला और उन्हें प्रदर्शन के मुद्दों की भी जानकारी नहीं थी.
ADVERTISEMENT










