रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश को लेकर चल रहे विवाद में बड़ी राहत सामने आई है. कमिश्नरी कोर्ट ने अगली सुनवाई तक भवनों पर बुलडोजर चलाने या किसी भी तरह के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक (स्टे) लगा दी है. कोर्ट के इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए फैसले का स्वागत किया है. हालांकि पिछले 10 दिनों से विश्वविद्यालय के बाहर धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल स्टे की नहीं बल्कि इस ध्वस्तीकरण आदेश को पूरी तरह खारिज करने की है. यही वजह है कि स्टे मिलने के बाद भी छात्रों का प्रदर्शन फिलहाल जारी है.
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10 दिनों से धरने पर बैठे छात्रों को कोर्ट से बड़ी राहत
जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में स्थित 38 भवनों को अवैध बताकर जारी किए गए ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ छात्र और पूर्व छात्र पिछले 10 दिनों से लगातार कड़ाके के बीच यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय के एडमिशन के पीक टाइम पर ऐसी कार्रवाइयों से यूनिवर्सिटी की छवि खराब की जाती है और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ होता है. शनिवार को कमिश्नरी कोर्ट से स्टे मिलने के बाद परिसर में हलचल और तेज हो गई है.
"हमारी मांग स्टे की नहीं, आदेश खारिज करने की है" - छात्र
कमिश्नरी कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए विश्वविद्यालय के स्थानीय छात्र और पूर्व छात्रों ने संविधान और देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया.
अज़हर अहमद (छात्र): "हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होगा. आज स्टे हुआ है, तो हमें उम्मीद है कि कल कोर्ट इस अन्यायपूर्ण आदेश को पूरी तरह निरस्त भी करेगा."
जहीरुल हसन (बीए एलएलबी छात्र): "10 दिनों से हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. स्टे आ गया है लेकिन जब तक हमारे पास कोर्ट के आदेश की ऑफिशियल कॉपी नहीं आती, हम सभी छात्र आपस में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे. हमारी मुख्य मांग इस आदेश को निरस्त करने की थी."
पूर्व छात्र और वकीलों ने कोर्ट का किया शुक्रिया
यूनिवर्सिटी से लॉ (BA LLB) की पढ़ाई कर चुके एडवोकेट मुस्तकीम ने कहा कि वे कमिश्नरी कोर्ट के इस अंतरिम राहत वाले फैसले का स्वागत करते हैं और कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैंय हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल स्टे मिलने से मामला पेंडिंग ही रहता है. इसलिए जब तक मूल आदेश पूरी तरह खारिज नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने या न रखने को लेकर अंतिम फैसला छात्रों की सामूहिक सहमति से लिया जाएगा.
एडमिशन के समय नरेशन सेट करने का आरोप
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब भी जौहर यूनिवर्सिटी में एडमिशन का समय करीब आता है, तब भारी पुलिस बल तैनात कर और ऐसे आदेश जारी करके एक नकारात्मक माहौल बनाया जाता है. छात्रों ने तीन मुख्य मांगें उठाई थीं-ध्वस्तीकरण के आदेश को पूरी तरह निरस्त करना, प्रशासनिक दखल बंद करना और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को सुचारू रूप से चलने देना.
कोर्ट के इस स्टे ऑर्डर से भले ही फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों पर बुलडोजर की कार्रवाई रुक गई है. लेकिन आंदोलनकारी छात्रों का रुख साफ है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं मिलता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी.
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