उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने भीषण जलभराव का रूप ले लिया है जिससे प्रयागराज के कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले प्रयागराज के मोहल्लों में बारिश थमने के 48 घंटे बाद भी घुटने तक गंदा और सीवर का पानी भरा हुआ है. हालात इतने गंभीर हैं कि लोगों के घरों में गंदा पानी घुस गया है, चूल्हे ठप पड़ चुके हैं और बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है और जनप्रतिनिधि उनकी समस्याओं को सुनने के बजाय उन्हें धमकियां दे रहे हैं.
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48 घंटे बाद भी राहत नहीं, घरों में घुसा सीवर का पानी
प्रयागराज के कई इलाकों में बारिश बंद हुए दो दिन बीत जाने के बावजूद गलियां और सड़कें तालाब में तब्दील नजर आ रही हैं. बारिश का पानी लोगों के बेडरूम और किचन तक पहुंच चुका है, जिससे घर का कीमती सामान, गद्दे, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण बर्बाद हो चुके हैं.
स्थानीय निवासियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा 'लगातार जलभराव के कारण कई घरों में पिछले तीन-चार दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है. लोग पड़ोसियों और मदद पर आश्रित होकर किसी तरह भोजन कर रहे हैं.
सीवर बैक मारने से दुर्गंध: सीवर लाइनें पूरी तरह जाम हैं, जिससे गंदा पानी घरों में बैक मार रहा है. लोग रात-रात भर जागकर बाल्टियों से पानी बाहर फेंकने को मजबूर हैं.
बीमारियों का खतरा: घुटने तक भरे पानी के कारण लोग बीमार बच्चों को अस्पताल तक नहीं ले जा पा रहे हैं जिससे बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है.
बच्चों की पढ़ाई ठप, अभिभावक परेशान
जिला प्रशासन द्वारा बारिश के कारण स्कूलों में छुट्टियां तो घोषित कर दी गईं. लेकिन इससे जलभराव वाले क्षेत्रों के अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं. स्थानीय महिलाओं का कहना है कि जलभराव के कारण बच्चे न तो स्कूल जा पा रहे हैं और न ही ट्यूशन. कोचिंग जाने के लिए भी बच्चों को गहरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे गाड़ियों के इंजन तक खराब हो रहे हैं.
पूर्व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह पर डांटने और धमकी देने का आरोप
जलभराव से आक्रोशित स्थानीय लोगों और बुजुर्ग महिलाओं ने क्षेत्रीय विधायक व पूर्व मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि जब उन्होंने जल निकासी और सड़क बनवाने की मांग की तो उन्हें डांटकर चुप करा दिया गया और एफआईआर कराने की धमकी तक दी गई.
विपक्ष और स्थानीय निवासियों का कहना है कि महाकुंभ और 'स्मार्ट सिटी' के नाम पर हजारों करोड़ रुपये का बजट आया. लेकिन धरातल पर नाले और नालियों की स्थिति जस की तस है. कागजों में विकास के दावे किए जा रहे हैं. जबकि जमीनी हकीकत में जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर है.
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