Pratapgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में आपूर्ति विभाग के संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर सौरभ विश्वकर्मा की हत्या के मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. हत्या के चौथे दिन, रविवार को प्रशासन और स्थानीय नेताओं के समझाने और आश्वासन के बाद परिवार वाले आखिरकार अंतिम संस्कार के लिए मान गए.
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सुरक्षा के बीच श्रृंगवेरपुर घाट पर सौरभ का अंतिम संस्कार कर दिया गया. वहीं दूसरी तरफ, अब इस पूरी घटना पर सियासत भी तेज हो गई है. चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिवार से बात की है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) ने पुलिस पर परिवार को धमकाने और जबरन समझौता कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
कैसे हुई थी सौरभ की हत्या?
लीलापुर थाना क्षेत्र के हरिहरपुर सिंधौर गांव के रहने वाले सौरभ विश्वकर्मा (30 साल) लालगंज के पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर थे. गुरुवार की रात जब वह ड्यूटी से बाइक से घर लौट रहे थे, तभी लक्ष्मणपुर के पास कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और बुरी तरह पीटा. गंभीर रूप से घायल सौरभ की मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. इस घटना के बाद से परिवार वालों में भारी गुस्सा था और उन्होंने न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया था.
चंद्रशेखर आजाद ने किया वीडियो कॉल
शनिवार की शाम को आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर बात की है. उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और भरोसा दिलाया कि उन्हें हर हाल में इंसाफ मिलेगा. चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से प्रतापगढ़ आकर मुलाकात करने का भी वादा किया है.
सपा ने प्रशासन पर लगाया जबरन समझौते का आरोप
इस मामले में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता संदीप विश्वकर्मा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि जब शव बाहर रखा था, तब लालगंज के एसडीएम और सीओ (CO) ने पीड़ित पिता को एक बंद कमरे में ले जाकर जबरन समझौते के कागजों पर साइन कराने का दबाव बनाया गया है. सपा नेता ने आरोप लगाया कि आरोपियों को सत्ता पक्ष का संरक्षण मिला हुआ है और दबाव बनाकर ही रविवार सुबह जबरन अंतिम संस्कार करवाया गया है.
तीन आरोपी गिरफ्तार, कोटे की दुकान सील
पुलिस ने मृतक के पिता की शिकायत पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख संजय उर्फ बड़े तिवारी, उनके बेटे सौरभ, दरोगा तिवारी, सोनू, अनुज, अशोक तिवारी और 6 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस अब तक मुख्य आरोपी अवधेश तिवारी, सौरभ तिवारी और मिंटू उपाध्याय को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. इसके अलावा, प्रशासन ने आरोपियों से जुड़ी 'डांडी ग्राम सभा' की कोटे की दुकान (सस्ते गल्ले की दुकान) को भी सील कर दिया है और जिला पूर्ति विभाग ने उनका कोटा रद्द कर दिया है.
क्या हैं परिवार की प्रमुख मांगें?
भले ही प्रशासन के आश्वासन पर अंतिम संस्कार हो गया है, लेकिन पीड़ित परिवार अभी भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है. उनकी मांग है.
- सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जाए.
- आरोपियों के गल्ले का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द हो.
- मृतक सौरभ की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए.
- परिवार को 50 लाख रुपये का आर्थिक मुआवजा मिले.
- सुरक्षा के लिए परिवार को एक शस्त्र (हथियार) लाइसेंस दिया जाए.
फिलहाल पुलिस बाकी बचे हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है.
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