Umar Ahmed Convoy: माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे उमर अहमद के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोगों पर अब पुलिस का शिकंजा कसना शुरू हो गया है. 8 अगस्त को जब उमर को कड़ी सुरक्षा में लखनऊ जेल से प्रयागराज लाया जा रहा था, तब उसके पीछे कई लग्जरी गाड़ियां चल रही थीं. आरोप है कि रास्ते में प्रतापगढ़ के एक टोल प्लाजा पर इन गाड़ी सवारों ने टोलकर्मियों से गाली-गलौज की, बैरियर तोड़े और उन पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की है. टोल मैनेजर की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ था और अब पुलिस ने इस मामले में दो स्कॉर्पियो गाड़ियां जब्त कर ली हैं.
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उमर के काफिले में शामिल थे समर्थक
8 अगस्त 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट से पेरोल मिलने के बाद उमर अहमद को लखनऊ जेल से प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान लाया जा रहा था. उमर को पुलिस के वज्रवाहन में भारी सुरक्षा के बीच लाया जा रहा था. इसी दौरान उमर के कुछ समर्थक अपनी लग्जरी गाड़ियों में इस पुलिस काफिले का पीछा करते हुए लखनऊ से प्रयागराज तक पहुंच गए.
प्रतापगढ़ में टोल प्लाजा पर की गुंडई
यह काफिला जब प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र में पड़ने वाले अख्तियारी कोटिला टोल प्लाजा से गुजरा, तो वहां टोल टैक्स देने को लेकर विवाद हो गया. आरोप है कि गाड़ियों में सवार उमर के समर्थकों ने टोल देने से साफ इनकार कर दिया था. उन्होंने टोलकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, बैरियर तोड़ दिए और कर्मचारियों के ऊपर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश भी की है. इस घटना के बाद टोल प्लाजा के मैनेजर ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी.
2 स्कॉर्पियो सीज, आरोपियों की तलाश तेज
टोल मैनेजर की शिकायत पर हथिगवां थाने में सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा (अपराध संख्या 166/26) दर्ज किया गया था. जांच में जुटी पुलिस ने अब काफिले में शामिल दो स्कॉर्पियो गाड़ियों को सीज (जब्त) कर लिया है. पुलिस का फोकस अब सिर्फ गाड़ियों तक ही सीमित नहीं है. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि उस वक्त इन गाड़ियों में कौन-कौन लोग सवार थे. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.
छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने आया था उमर
आपको बता दें कि 6 अगस्त को अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा आबान अहमद, अपने भाई अली से मिलने झांसी जेल जा रहा था. रास्ते में हुए एक सड़क हादसे में आबान की मौत हो गई थी. इसके बाद 7 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उमर (लखनऊ जेल) और अली (झांसी जेल) को अपने छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए कुछ शर्तों के साथ पेरोल दी थी. इसी पेरोल पर उमर 8 अगस्त को प्रयागराज आ रहा था, जब उसके समर्थकों ने रास्ते में यह गुंडागर्दी की.
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