Marble Mosque Dispute Prayagraj: संगम नगरी प्रयागराज में नार्थ सेंट्रल रेलवे के प्रयागराज जंक्शन पर स्टेशन के पुनर्निर्माण और विस्तार की कवायद तेज हो गई है. इसी क्रम में रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के सिटी साइड स्थित एक मस्जिद को हटाने के लिए नोटिस जारी किया है. रेलवे का दावा है कि यह मस्जिद रेलवे की भूमि पर अनाधिकृत रूप से बनी है. इस नोटिस के बाद मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है और मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंचने की तैयारी है.
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क्या है रेलवे का नोटिस?
रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर द्वारा 10 अप्रैल को जारी किए गए नोटिस में मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली को स्पष्ट रूप से सूचित किया गया है कि आगामी 15 अप्रैल से स्टेशन के पुनर्निर्माण का कार्य प्रस्तावित है. नोटिस में कहा गया है कि सिटी साइड के सर्कुलेटिंग एरिया में स्थित यह मस्जिद रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण है. प्रशासन ने कमेटी को 27 अप्रैल तक मस्जिद की बिल्डिंग खाली करने का अंतिम समय दिया है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जगह खाली नहीं की गई तो तोड़फोड़ की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और होने वाले किसी भी नुकसान के लिए जिम्मेदारी मस्जिद कमेटी की होगी.
कमेटी का पक्ष और इतिहास
इस नोटिस के बाद मस्जिद कमेटी ने मोर्चा खोल दिया है. कमेटी का दावा है कि यह मस्जिद यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में विधिवत दर्ज है. मस्जिद के इतिहास पर गौर करें तो इसे 'संगमरमर वाली मस्जिद' के नाम से जाना जाता है. कमेटी का कहना है कि 22 नवंबर 1961 को तत्कालीन उप रेलवे मंत्री मेजर जनरल शाहनवाज खान ने पुरानी कच्ची मस्जिद को हटवाकर यहां पक्की मस्जिद का निर्माण कराया था जिसके बाहर संगमरमर के पत्थर लगे हुए हैं. कमेटी इस नोटिस को पूरी तरह से अनुचित मान रही है.
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
मस्जिद कमेटी के सदस्यों का कहना है कि वे इस कार्रवाई को चुनौती देने के लिए तैयार हैं.इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता मोहम्मद हन्ज़ला फारुकी के अनुसार, रेलवे के इस नोटिस के खिलाफ कमेटी के लोग अब कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. फिलहाल यह मामला कानूनी दांव-पेच में उलझता नजर आ रहा है क्योंकि रेलवे अपने विस्तार कार्य पर अडिग है जबकि कमेटी मस्जिद के ऐतिहासिक और कानूनी पक्ष को लेकर हाईकोर्ट में अपनी बात रखने की रणनीति बना रही है.
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