PDA Sealing Action: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण और दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है. इस हादसे में कई मासूम बच्चों की जान चली गई, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाकर पूरे राज्य में कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों की सघन चेकिंग के निर्देश दिए हैं. सीएम के आदेश के बाद संगम नगरी प्रयागराज में प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. इसी क्रम में प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मानक पूरे न करने पर मशहूर कोचिंग संस्थान 'खान ग्लोबल क्लासेस' को सील कर दिया है. प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध और बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के चल रहे कोचिंग संचालकों में हड़कंप मच गया है.
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खान ग्लोबल क्लासेस पर सील तोड़ते ही होगी FIR
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के जोनल अधिकारी गंगेश कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने 'खान ग्लोबल क्लासेस' पर बड़ी सीलिंग की कार्रवाई की. नियमों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाए जाने पर संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया और मुख्य द्वार पर नोटिस बोर्ड चस्पा कर दिया गया है. प्रशासन ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर सील तोड़ने की कोशिश की गई या दोबारा चोरी-छिपे कोचिंग का संचालन किया गया तो सचालकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी.
CFO चंद्रमोहन शर्मा के नेतृत्व में 10 टीमों की छापेमारी
प्रयागराज के मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) चंद्रमोहन शर्मा ने बताया कि कमिश्नर के निर्देश पर कुल 10 टीमें शहर के कई प्रशिक्षण संस्थानों, कॉलेजों, ट्रेनिंग सेंटरों और कोचिंग सेंटरों की जांच कर रही हैं. शहर क्षेत्र की दो टीमों के साथ खुद सीएफओ भी जमीन पर उतरे. जांच के दौरान सुबह से ही कई नामचीन संस्थानों में गंभीर कमियां पाई गईं, जिसके बाद उन्हें 5 से 7 दिनों का समय देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
संदेश कोचिंग में सामने आई सुरक्षा की बेहद शर्मनाक तस्वीर
लखनऊ हादसे के बाद जब ग्राउंड जीरो पर सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की गई तो शहर के 'संदेश कोचिंग' संस्थान में दावों की पोल पूरी तरह से खुल गई और लापरवाही का एक बेहद ही शर्मनाक मंजर देखने को मिला. यहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रखते हुए छात्रों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा था. कोचिंग में लगा अग्निशमन यंत्र सालों पहले एक्सपायर हो चुका था, जिस पर साल 2023 की तारीख दर्ज थी यानी आपातकाल में यह सिलेंडर किसी काम का नहीं था.
लापरवाही का आलम यहीं खत्म नहीं हुआ. जिन फायर सिलेंडरों को नियमों के मुताबिक दीवार पर टंगा होना चाहिए था, वे जमीन पर लावारिस हालत में कबाड़ की तरह पड़े हुए थे. हद तो तब हो गई जब आग बुझाने के लिए रखी गई आपातकालीन बाल्टियों की जांच की गई. इनमें जीवन रक्षक रेत (बालू) होने के बजाय चाय के कुल्हड़ और कचरा भरा हुआ पाया गया. इसके साथ ही, यह पूरा कोचिंग संस्थान एक बेहद पुरानी और जर्जर हो चुकी इमारत में संचालित हो रहा था, जहां भारी मात्रा में लकड़ी के डेस्क और बेंच रखे हुए थे. ऐसे घुटन भरे और जर्जर माहौल में मौजूद यह लकड़ियों का जंजाल किसी भी संभावित अग्नि दुर्घटना में आग भड़काने के लिए बारूद का काम करने को तैयार बैठा था.
छात्रों को ट्रेनिंग और अभिभावकों से खास अपील
निरीक्षण के दौरान अधिकारी न सिर्फ कमियां ढूंढ रहे हैं, बल्कि वहां पढ़ रहे छात्र-छात्राओं से भी सीधा संवाद कर रहे हैं. बच्चों को सिखाया जा रहा है कि अगर कभी अचानक आग लग जाए तो पैनिक होने के बजाय खुद को और अपने साथियों को सुरक्षित कैसे बाहर निकालना है. इसके साथ ही सीएफओ ने जनता, छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी कोचिंग, मॉल, अस्पताल या सिनेमाघर में जाएं तो वहां की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच जरूर करें और कमी दिखने पर प्रबंधन से कड़ाई से शिकायत दर्ज कराएं.
कानपुर और फिरोजाबाद समेत पूरे प्रदेश में मचा हड़कंप
बता दें कि लखनऊ हादसे का असर केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं है. राज्य सरकार के सख्त आदेश के बाद प्रदेश के अन्य बड़े जिलों जैसे कानपुर, फिरोजाबाद, वाराणसी, मेरठ और आगरा से भी स्थानीय प्रशासन और फायर ब्रिगेड द्वारा कोचिंग संस्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी और सीलिंग की खबरें सामने आ रही हैं. कानपुर में बेसमेंट में चल रहे कई सेंटरों को बंद करने की चेतावनी दी गई है, वहीं फिरोजाबाद में भी बिना एनओसी (NOC) के धड़ल्ले से चल रहे शैक्षणिक संस्थानों को नोटिस थमाए गए हैं. पूरे प्रदेश में इस समय अवैध रूप से चल रहे कोचिंग संचालकों के खिलाफ चौतरफा शिकंजा कसा जा चुका है.
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