Deoria Manish Singh murder: उत्तर प्रदेश के गोंडा में विनोद सहनी की हत्या का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब देवरिया में मनीष सिंह हत्याकांड ने पूर्वांचल की सियासत में उबाल ला दिया है. 23 साल के मनीष की उसके घर से महज 200 मीटर की दूरी पर बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिसके बाद सेंथवार समाज का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा. शुक्रवार को जब मनीष का शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा, तो सैकड़ों ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया. लोगों का सीधा आरोप पुलिस की लापरवाही पर है, क्योंकि मनीष ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस से पहले ही शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. अब लोग आरोपियों के एनकाउंटर और उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे हैं.
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शिकायत के बाद भी नहीं बची जान
इस हत्याकांड ने देवरिया पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जानकारी के मुताबिक, मनीष ने अपनी मौत से पहले 1 सितंबर को ही भलुआनी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी हत्या हो सकती है. लेकिन पुलिस ने उसकी इस शिकायत पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. 3 सितंबर को जब एक आरोपी ने मनीष को चाकू लेकर दौड़ाया, तब भी मनीष ने सिपाही को फोन किया, लेकिन सिपाही ने देवरिया में होने की बात कहकर टाल दिया. इसके बाद गुरुवार रात मनीष की हत्या हो गई. परिवार और लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई करती, तो मनीष की जान बच सकती थी.
आरोपियों के एनकाउंटर की मांग
मनीष की निर्मम हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश है. प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि आरोपी शातिर गैंगेस्टर हैं और उनके खिलाफ पहले से ही थानों में 10 से 15 गंभीर मुकदमे दर्ज हैं. लोगों का आरोप है कि इतने मुकदमों के बावजूद आरोपी बेखौफ होकर खुलेआम घूमते हैं और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है. अब मृतक के परिवार और ग्रामीणों की साफ मांग है कि हत्यारों का एनकाउंटर किया जाए और उनके घरों पर बुलडोजर चलाकर कड़ी सजा दी जाए, ताकि उन्हें भी पुलिस का खौफ याद रहे.
लापरवाह थानेदार और सिपाही सस्पेंड
लोगों के भारी हंगामे और प्रदर्शन के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. देवरिया के एसपी ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भलुआनी के थानेदार राकेश राय, चौकी इंचार्ज ज्योति कुमारी और एक सिपाही को लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. हालांकि, इस निलंबन के बाद भी परिवार और सेंथवार समाज का गुस्सा शांत नहीं हुआ है. पूर्वांचल में सेंथवार समाज की अच्छी खासी आबादी है, ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कानून व्यवस्था को लेकर उठा यह मुद्दा सरकार और विपक्ष दोनों के लिए सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा है.
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