Basti Honey Trap Case: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में पुलिस विभाग को झकझोर कर रख देने वाला एक मामला सामने आया है. यहां वाल्टरगंज थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह, ने 29 अगस्त को अपने सरकारी आवास पर आत्महत्या की थी. पुलिस ने दावा किया है कि इस आत्महत्या के पीछे एक बड़े 'हनी ट्रैप' गिरोह का हाथ है, जो लंबे समय से रसूखदार लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल कर रहा था. पुलिस ने इस गिरोह की मास्टरमाइंड महिला, उसके पिता और एक वकील को गिरफ्तार कर लिया है.
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हनी ट्रैप में फंसाकर बनाया प्राइवेट वीडियो
पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे खेल की मुख्य आरोपी प्रियंका चौधरी है. प्रियंका ने पहले इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश सिंह से नजदीकियां बढ़ाईं. इसके बाद कथित तौर पर उनके कुछ प्राइवेट पलों के वीडियो बना लिए. वीडियो बनने के बाद प्रियंका ने इंस्पेक्टर को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया.
1 करोड़ रुपये की कर रही थी मांग
पुलिस का दावा है कि प्रियंका और उसका गिरोह इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश से वीडियो के नाम पर 1 करोड़ रुपये की मांग कर रहा था. आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए इंस्पेक्टर को वीडियो भेजकर उन पर भारी मानसिक दबाव बनाया. लगातार मिल रही धमकियों और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश ने 29 अगस्त को आत्महत्या कर ली.
मुंबई के स्पा सेंटर से सीखा 'काला खेल'
आरोपी प्रियंका चौधरी पिछले करीब 10 सालों से अपने पति से अलग रह रही थी. वह मुंबई के ब्यूटी पार्लर और स्पा सेंटर्स में काम करती थी. वहीं पर उसने रसूखदार और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को फंसाने के तरीके सीखे. प्रियंका का काम था लोगों से दोस्ती करना, उनका भरोसा जीतना और फिर प्राइवेट वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करना. अगर कोई पैसे देने से मना करता, तो वह वीडियो कॉल पर खुद को नुकसान पहुंचाने का नाटक करती और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देती थी.
पिता और वकील मिलकर करते थे वसूली
इस काले कारोबार में प्रियंका अकेली नहीं थी. पुलिस का कहना है कि उसका पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव भी इस गिरोह का अहम हिस्सा थे. प्रियंका जहां लोगों को अपने जाल में फंसाती थी, वहीं उसका पिता और वकील आगे की रणनीति तैयार करते थे. ये लोग मिलकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते और समझौते के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे. इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश की आत्महत्या वाले दिन दोपहर में भी वकील ने उनसे बातचीत कर पैसों के लिए नेगोशिएट करने की कोशिश की थी.
पहले भी कई लोगों को बना चुकी है शिकार
बस्ती पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने पहले भी कई लोगों को अपना शिकार बनाया था. पुलिस के मुताबिक, प्रियंका ने अपने ही मकान मालिक से करीब 4 लाख रुपये वसूले थे. इसके अलावा उसने अपने ड्राइवर से 5 लाख रुपये और मध्य प्रदेश के एक व्यापारी से करीब 15 लाख रुपये ऐंठे थे.
तीनों आरोपी गिरफ्तार, जेल भेजे गए
डिजिटल सबूतों, बैंक लेनदेन और पीड़ितों के बयानों के आधार पर पुलिस ने प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह का नेटवर्क दूसरे राज्यों में तो नहीं फैला था और क्या कुछ और लोग भी इनके शिकार हुए हैं.
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