BSP में फिर हुआ बड़ा उलटफेर! आकाश आनंद पूरी तरह से हुए साइडलाइन, छोटे भाई को मिली बड़ी जिम्मेदारी

यूपी तक

• 11:55 AM • 07 Sep 2026

Akash Anand: बसपा में संगठनात्मक फेरबदल के बीच आकाश आनंद को एक बार फिर कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी गई है. आकाश आनंद के छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन की कई जिम्मेदारियां सौंपी गई है, जिससे उनका पार्टी में कद बढ़ा है.

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Akash Anand: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी प्रमुख मायावती ने एक बड़ा फैसला लेते हुए आकाश आनंद को पूरी तरह से किनारे कर दिया है. संगठन में हुए नए बदलावों में आकाश को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है. उनके छोटे भाई ईशान आनंद का कद पार्टी में बढ़ा दिया गया है. पार्टी से साइडलाइन होने के बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट का बायो बदल लिया है.

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आकाश आनंद फिर किए गए किनारे

बसपा के नए संगठनात्मक ढांचे में आकाश आनंद का नाम किसी भी पद या जिम्मेदारी के लिए शामिल नहीं किया गया है. जिम्मेदारी छिनने के साथ ही उन्होंने अपने सोशल मीडिया बायो में भी बड़ा बदलाव किया है. कुछ समय पहले तक खुद को 'बसपा कार्यकर्ता' बताने वाले आकाश ने अब अपने बायो में खुद को सिर्फ 'बसपा समर्थक' लिख दिया है. इससे पहले उन्होंने अपने प्रोफाइल से 'नेशनल कन्वीनर' का पद हटाकर खुद को कार्यकर्ता बताया था.

भाई ईशान को मिली बड़ी जिम्मेदारी

जहां एक तरफ आकाश आनंद को साइडलाइन किया गया है, वहीं उनके छोटे भाई ईशान आनंद को पार्टी में मुख्य सेक्टर प्रभारी जैसी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है. मायावती ने ईशान को करीब 15 राज्यों में पार्टी के कामकाज और संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करने का काम दिया है. ईशान अपनी यह रिपोर्ट सीधा अपने पिता और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को सौंपेंगे. यह फैसला बताता है कि संगठन में ईशान की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

बायो बदलने से तेज हुईं चर्चाएं

आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया बायो में 'बसपा समर्थक' लिख लिया है, जिससे उनको लेकर पार्टी में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. उन्होंने अभी तक पार्टी छोड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. 

पहले भी कई बार छिना है पद

यह कोई पहला मौका नहीं है जब आकाश आनंद के पदों में बदलाव हुआ है. साल 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सीतापुर में भड़काऊ भाषण देने पर मायावती ने उन्हें अपरिपक्व बताते हुए उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिया था. इसके बाद जून 2024 में उन्हें दोबारा जिम्मेदारी मिली. फिर मार्च 2025 में ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में आकर पार्टी नेताओं को चुनौती देने, गुटबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप में उन्हें पद से हटाकर पार्टी से निकाल दिया गया था. हालांकि, मई 2025 में मायावती ने उन्हें वापस बुलाकर मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक बनाया था, लेकिन अब एक बार फिर उनके बायो बदलने से नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं.