Swatantra Bhardwaj Viral Video: जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक आंदोलन में शामिल हुई एक लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाले हिंदूवादी एक्टिविस्ट स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वायरल पॉडकास्ट वीडियो में स्वतंत्र हंसते हुए सिर फोड़ने की बात कबूल की है और कुछ नेताओं के साथ अपने संबंधों का जिक्र भी किया है. वीडियो वायरल होने के बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं. विवाद बढ़ने पर स्वतंत्र भारद्वाज ने सामने आकर अपनी सफाई दी है और खुद को निर्दोष बताते हुए इसे अपने खिलाफ एक साजिश बताया है.
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'आत्मरक्षा में कड़ा लग गया था'
स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी सफाई में कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग पीएम मोदी और सनातन धर्म को लेकर अभद्र टिप्पणी कर रहे थे. जब उसने इसका विरोध किया तो वहां मौजूद लोगों ने उसकी मॉब लिंचिंग करने की कोशिश की और उसे जमीन पर गिरा दिया. स्वतंत्र का दावा है कि जब वह खुद को बचाने की कोशिश कर रहा था, तब गलती से उसके हाथ में पहना कड़ा लड़की के पिता (संजय कुमार) के सिर पर लग गया था.
'मेडिकल रिपोर्ट में नहीं आए टांके'
पीड़ित लड़की निशु आजाद का आरोप है कि उसके पिता के सिर में 7 टांके आए थे, लेकिन पुलिस ने आरोपी पर हत्या के प्रयास (धारा 307) का मामला दर्ज नहीं किया था. इस पर स्वतंत्र ने पलटवार करते हुए कहा कि आरएमएल अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट में सिर फटने या 7 टांके लगने की बात झूठी साबित हुई है. पुलिस जांच में भी यह स्पष्ट हो गया है कि चोट मामूली थी.
'नेता भाई हैं, फोन कॉल नहीं आया'
वायरल वीडियो में पीएम मोदी, कपिल मिश्रा और चिराग पासवान का नाम लेने पर स्वतंत्र ने कहा कि वह एक प्रोपेगेंडा के तहत 'हिंदू हिंदू भाई भाई' अभियान चलाता है. इसी संदर्भ में उसने इन नेताओं को अपना बड़ा भाई बताया था. उसने स्पष्ट किया कि उसे बचाने के लिए किसी नेता का फोन नहीं आया था, बल्कि यह सिर्फ एक व्यंग्य (सार्केस्टिक) था जिसे गलत तरीके से पेश किया गया.
जान से मारने की मिल रही धमकी
स्वतंत्र भारद्वाज का कहना है कि उसे लगातार जान से मारने और सिर कलम करने की धमकियां मिल रही हैं, लेकिन इस पर कोई नेता कुछ नहीं बोल रहा है. उसका आरोप है कि विपक्ष के नेता उसकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि वह सनातन धर्म और गो-रक्षा के लिए काम करता है.
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
इस मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में मामला तो दर्ज हुआ था, लेकिन पुलिस ने सिर में क्रैक या गंभीर चोट लगने की खबरों को गलत बताया. पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज और उसके साथी को मामूली धाराओं में हिरासत में लिया और नोटिस देकर छोड़ दिया. अब सीजेपी और विपक्ष के नेता पुलिस पर आरोपी को बचाने का आरोप लगा रहे हैं.
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