IAS दिव्या मित्तल ने अचानक दिया इस्तीफा, सोशल मीडिया पोस्ट पर बताई ये चौंकाने वाली वजह

यूपी तक

• 12:01 PM • 30 Aug 2026

IAS Divya Mittal Resignation: आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 2013 बैच की अधिकारी ने सोशल मीडिया पर भावुक पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी है.

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IAS Divya Mittal Resignation: उत्तर प्रदेश की तेजतर्रार और अपनी बेबाक कार्यशैली के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या फिलहाल यूपी के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं. उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक खत लिखकर 13 साल की अपनी इस प्रशासनिक यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देने की जानकारी दी है.

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अचानक इस्तीफे से हर कोई हैरान

कुछ दिनों पहले यूपी में बड़े स्तर पर आईएएस अधिकारियों के तबादले हुए थे. इसी दौरान दिव्या मित्तल को देवरिया के डीएम पद से हटाकर राजस्व विभाग में भेजा गया था. अपने कार्यकाल के दौरान देवरिया, मिर्जापुर और संत कबीर नगर की डीएम रह चुकीं दिव्या हमेशा जनता के बीच अपनेपन और कड़े फैसलों के लिए जानी जाती थीं. उनके अचानक इस्तीफा देने से हर कोई हैरान है.

लंदन की नौकरी छोड़ बनीं आईएएस

दिव्या मित्तल ने अपने खत में बताया कि उन्होंने आईआईटी और आईआईएम बैंगलोर से पढ़ाई की थी. इसके बाद उनकी लंदन में नौकरी लग गई, लेकिन वहां उन्हें अपने देश की कमी खलती थी. देश की मिट्टी का कर्ज चुकाने और कुछ करने के सपने के साथ वह भारत वापस लौटीं और आईएएस अधिकारी बनीं. उनके पति गगनदीप भी आईएएस अधिकारी हैं और दोनों ने लंदन से लौटकर ही एक साथ यूपीएससी की तैयारी की थी.

मिर्जापुर की बुजुर्ग मां का जिक्र

अपने पोस्ट में दिव्या ने मिर्जापुर के हलिया ब्लॉक के लहरिया दाह गांव का विशेष जिक्र किया है. आजादी के 75 साल बाद इस गांव में उनके ही प्रयास से पहली बार पानी पहुंचा था. उन्होंने लिखा कि गांव की एक बुजुर्ग महिला ने कांपते हाथों से उनके सिर को छूकर जो आशीर्वाद दिया, वह उनके जीवन का सबसे अनमोल पल था. उन्होंने लिखा कि पद तो छूट गया है, लेकिन वो स्पर्श और देश के लिए देखा गया सपना कभी नहीं छूटेगा.

नेताओं से भी हुआ था टकराव

दिव्या मित्तल हमेशा अपने निडर अंदाज के लिए चर्चा में रहीं. पिछले साल जुलाई में देवरिया का डीएम रहते हुए उन्होंने एक बैठक में सांसदों और विधायकों को मंच से साफ कह दिया था कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए अधिकारियों पर दबाव बिल्कुल न डालें. मिर्जापुर में डीएम रहने के दौरान भी उनका राजनीतिक टकराव हुआ था, जिसके बाद उन्हें काफी समय तक बिना पोस्टिंग के भी रखा गया था.