दिल्ली के सत्यनिकेतन इलाके में एक 5 मंजिला पीजी के अचानक ढह जाने से हुए दर्दनाक हादसे में मारे गए 7 लोगों में वाराणसी के 20 वर्षीय छात्र अभिषेक खरवार भी शामिल हैं. 7 सितंबर को जब अभिषेक का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया. हिंडालको में कार्यरत अभिषेक के पिता संतोष खरवार ने रोते-बिलखते हुए दिल्ली में चल रहे पीजी हॉस्टलों के रवैये और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि पीजी संचालक मोटी फीस और एडवांस तो वसूलते हैं. लेकिन बच्चों को न तो सुरक्षा मिलती है और न ही रहने-खाने की सही व्यवस्था.
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मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम सेकंड ईयर का छात्र था अभिषेक
अभिषेक चंदौली के झांसी गांव का मूल निवासी था और दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज से बीकॉम सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था. उसके पिता ने बताया कि अभिषेक पढ़ाई में बहुत अच्छा था और बीकॉम के साथ-साथ एमबीए प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था. वह 2025 में दिल्ली आया था और सत्यनिकेतन स्थित एक पीजी में रह रहा था.
'11 महीने का एग्रीमेंट और मोटी फीस ले लेते हैं, मजबूरी में फंस जाता है छात्र'
पिता संतोष खरवार ने पीजी संचालकों के सिंडिकेट (नेक्सेस) पर दर्द छलकाते हुए कहा कि अभिभावकों से 11 महीने की फीस का एग्रीमेंट कराया जाता है और 2 महीने का एडवांस जमा करा लिया जाता है. उन्होंने बताया कि हर महीने ₹13,000 की फीस ली जाती थी. अगर बच्चा वहां की खराब व्यवस्था से तंग आकर पीजी छोड़ना भी चाहे तो उसका पूरा पैसा डूब जाता है.
उन्होंने कहा कि कोई भी अभिभावक बाहर से देखकर ही दाखिला कराता है. अंदर सुरक्षा या मेंटेनेंस का ध्यान नहीं रखा जाता। खाने की व्यवस्था भी इतनी खराब होती है कि बच्चों को बाहर से खाना पड़ता है.
'हादसे से एक दिन पहले हुई थी बात'
अभिषेक के पिता ने बताया कि घटना से ठीक एक दिन पहले 5 सितंबर को उनकी बेटे से बात हुई थी. उन्होंने हॉस्टल और पढ़ाई की फीस जमा की थी. अभिषेक ने कभी इमारत की जर्जर हालत का जिक्र नहीं किया था वरना वे तुरंत उसका रूम बदलवा देते.
हादसे में 7 की मौत
सत्यनिकेतन इलाके में हुए इस दर्दनाक हादसे में कुल 7 लोगों की मौत हुई है जिनमें 5 छात्र शामिल हैं. हादसे के बाद एक्शन में आई दिल्ली पुलिस ने पीजी/इमारत के मालिक हरिराम, उसकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एमसीडी के 5 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है.
आगे किसी और परिवार का बच्चा न गंवाए जान
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अभिषेक के अंतिम संस्कार के दौरान उसके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था. पिता ने सरकार और प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि वे कोई मुआवजा नहीं चाहते बल्कि यह मांग करते हैं कि दिल्ली में चल रहे सभी पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा व रहने-खाने की व्यवस्था को कड़ाई से सुधारा जाए ताकि भविष्य में किसी और मां-बाप को अपना बच्चा न खोना पड़े.
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