गाजीपुर में निशा विश्वकर्मा की मौत का असली सच क्या है? हरिओम और अभिषेक पांडे ने मिलकर रची था साजिश या कुछ और है मामला

आशीष श्रीवास्तव

24 Apr 2026 (अपडेटेड: 24 Apr 2026, 01:18 PM)

Ghazipur Nisha Murder Case Update: गाजीपुर के कटारिया गांव में निशा की संदिग्ध मौत के बाद उपजे विवाद और हिंसा ने गांव को अखाड़ा बना दिया. इसे सियासी और जातीय रंग देने की कोशिश में सपा कार्यकर्ताओं ने पथराव किया. पुलिस ने 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

Nisha Murder Case Update

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Ghazipur Nisha Murder Case Update: गाजीपुर का कटारिया गांव इन दिनों एक ऐसी खामोशी और डर के साये में है जहां गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है. लेकिन दरवाजों के पीछे से झांकती आंखें किसी बड़े तूफान के गुजरने की गवाही दे रही हैं. निशा विश्वकर्मा की संदिग्ध मौत के बाद यह गांव किसी अखाड़े के मैदान में बदल गया. पुलिस की भारी तैनाती और जगह-जगह बिखरे पत्थर इस बात का प्रमाण हैं कि यहां सिर्फ एक बेटी की मौत पर आंसू नहीं बहे बल्कि एक सोची-समझी सियासी खेल खेलने की कोशिश की गई जिसने गांव की शांति को भंग कर दिया.

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क्या है मौत का सच?

पुलिस जांच के अनुसार, मृतका निशा विश्वकर्मा के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज आत्महत्या की ओर इशारा कर रहे हैं. पुलिस कहती है कि निशा ने आत्महत्या की है. निशा के आखिरी कॉल, सीसीटीवी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सब उसी ओर इशारा करते हैं. हालांकि गांव में चर्चाएं कुछ और ही थीं. मनोहर जैसे ग्रामीणों के बयानों से साफ पता चलता है कि सोशल मीडिया पर इस घटना को तकनीकी और भावनात्मक रूप से इस तरह पेश किया गया कि मामला गैंगरेप और हत्या के रूप में स्थापित हो गया.

निशा की मां ले लगाए ये आरोप

निशा की मां ने हरिओम पांडे संग प्रेम संबंध की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि निशा हत्याकांड में हरिओम पाण्डेय और उसका उसका दोस्त भिषेक पांडे शामिल है. लेकिन इन सबके बीच जो सबसे खतरनाक चीज दिखती है वो है- अफवाह और उसे हथियार बनाकर खड़ा किया गया गुस्सा. जो आपस में ब्राह्मणों और ठाकुरों के साथ यादव के बीच टकराव के रूप में देखने को मिला. इस मामले को जातीय रंग देने की पूरी तैयारी थी. गाजीपुर के एसपी ईराज राजा के मुताबिक, एक लोकल यूट्यूबर और कुछ स्थानीय नेताओं जैसे अनिल यादव के जरिए ये नैरेटिव खड़ा किया गया कि 'ओबीसी समाज की बेटी के साथ अत्याचार हुआ है.'इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 15 लोगों के प्रतिनिधिमंडल की आड़ में 300-400 लोगों की भीड़ को गांव में दाखिल कर दिया.

जब गांव बना अखाड़ा

गांव वालों के मुताबिक, पुलिस ने जब अंबेडकर चौक पर इस अनियंत्रित भीड़ को रोकने की कोशिश की तो स्थिति बेकाबू हो गई. अचानक पथराव शुरू हुआ और देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने गांव को घेर लिया. गलियों में बिखरे ईंट-पत्थर अब भी उस हिंसा की गवाही दे रहे हैं. पुलिस का साफ आरोप है कि यह एक सुनियोजित दंगा भड़काने की कोशिश थी जिसे हवा देकर सियासी रोटियां सेंकने का प्रयास किया गया.

10 आरोपी गिरफ्तार

उपद्रव को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 47 समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. अब तक 10 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है जबकि 200 से अधिक अज्ञात लोगों की पहचान के लिए पुलिस दबिश दे रही है. एसपी ईराज राजा ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों और दंगा भड़काने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.