क्या UP में अधूरे मेडिकल कॉलेजों का हुआ उद्घाटन? 7 जिलों के रिएलिटी चेक से जानिए पूरा सच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से नौ मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने सिद्धार्थनगर में बने मेडिकल कॉलेज…

यूपी तक

• 04:41 PM • 26 Oct 2021

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से नौ मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने सिद्धार्थनगर में बने मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ वहीं से एटा, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर, देवरिया, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर के मेडिकल कॉलेजों का भी डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया.

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इनमें से आठ मेडिकल कॉलेज केंद्र प्रायोजित योजना के तहत स्वीकृत किए गए हैं, जबकि जौनपुर में मेडिकल कॉलेज को राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से तैयार कराया है.

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले, केंद्र और यूपी में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) एक साथ 9 मेडिकल कॉलेजों के उद्घाटन को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है.

इस बीच, यूपी तक ने इनमें से 7 मेडिकल कॉलेज पर पहुंचकर यह जानने की कोशिश की है कि कितने कॉलेज पूरी तरह बनकर तैयार हैं और वहां सुविधाओं की क्या स्थिति है.

इस स्थिति को जानने से पहले यह भी जान लीजिए कि इन मेडिकल कॉलेजों के ”अधूरे बने होने” के दावों पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के ACS सूचना नवनीत सहगल का क्या कहना है.

”सभी 9 अस्पतालों में 300 बेड के अस्पतालों के मानक पूरे किए जा चुके हैं. नेशनल मेडिकल कमीशन ने सभी अस्पतालों के मानक को जांचा परखा है और उसके इन्सपेक्शन के बाद ही इनका उद्घाटन हुआ है. 300 बेड के बाद दूसरे फेज के लिए 500 बेड बनाए जाने हैं, जिसका काम चल रहा है. इन सभी 9 मेडिकल कॉलेजों में इस साल NEET के तहत दाखिले भी होंगे, ऐसे में आधे-अधूरे का सवाल ही नहीं है. मानक नेशनल मेडिकल कमीशन तय करता है और जब मानक पूरा हुआ है, तभी इन मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया गया है.”

नवनीत सहगल

अब पढ़िए, यूपी तक की खास ग्राउंड रिपोर्ट:

हरदोई: मेडिकल कॉलेज के कैंपस से दस किलोमीटर दूर होगा इलाज

सरकार ने यहां के मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 206 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था, जिसके तहत अब तक मेडिकल कॉलेज का करीब 90 फीसदी ही काम पूरा हुआ है. इस मेडिकल कॉलेज के शैक्षिक परिसर में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री विभागों और प्रयोगशालाओं के निर्माण के अलावा छात्र-छात्राओं के छात्रावास, चिकित्सा शिक्षकों के आवास, कर्मचारियों के आवास का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के लिए चिकित्सा शिक्षकों की भी नियुक्ति हो चुकी है. जूनियर से लेकर सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी तैनात हैं.

मगर जब यूपी तक की टीम ने मेडिकल कॉलेज के अस्पताल को लेकर स्थिति जानी तो पता चला कि इस कैंपस में मरीजों के इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. मरीजों का इलाज इस मेडिकल कॉलेज के शैक्षिक कैंपस से दस किलोमीटर दूर शहर में बने जिला अस्पताल में किया जाएगा और वहीं मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और नए वॉर्ड बनेंगे. जब हमने उस जगह को देखा तो पाया फिलहाल मेडिकल कॉलेज से जुड़ा अस्पताल नहीं बना है. जिला चिकित्सालय परिसर में ही एक नौ मंजिला बिल्डिंग और मेडिकल कॉलेज की ओपीडी के निर्माण का काम किया जा रहा है, जिसकी अभी पहली मंजिल तक नहीं बनी है.

उम्मीद की जा रही है कि अगले साल तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा. मेडिकल कॉलेज का हॉस्पिटल बनने के बाद यहां पर मरीजों के लिए 500 बेड निर्धारित किए जाएंगे. साथ ही 30 बेड की इमरजेंसी सेवा भी संचालित रहेगी, इसके अलावा तमाम चिकित्सा विभाग भी खुलेंगे.

जौनपुर: आधा-अधूरा है काफी काम

यूपी तक के रिएलिटी चेक में उमानाथ सिंह स्वायत्तशासी मेडिकल कॉलेज जौनपुर का निर्माण भी आधा-अधूरा पाया गया.

यहां मरीजों के इलाज के लिए ओपीडी की व्यवस्था भी दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रही है. वहीं मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग के दूसरे हिस्से में अभी भी निर्माण कार्य जारी है. इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज के अंदर जाने वाली सड़कें भी अभी तक पूरी तरह बन नहीं पाई हैं.

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर शिव कुमार के मुताबिक, क्लासरूम, लाइब्रेरी और हॉस्टल बनकर तैयार हो गए हैं. साथ ही साथ उच्च पदों पर नियुक्तियां कर ली गई हैं. 70 से 75 पदों पर नियुक्तियां आयोग द्वारा की जाएंगी, इसके अलावा आउटसोर्सिंग कंपनियों के द्वारा भी कई पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं.

जौनपुर के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर शिव कुमार ने भी वास्तविकता को स्वीकार करते हुए इस सत्र में एमबीबीएस के छात्रों की पढ़ाई शुरू करने को ही अपनी प्राथमिकता बताया. जिलाधिकारी ने कहा कि अभी आधा ही पैसा आया है, इसीलिए निर्माण कार्य अधूरा है, आने वाले दिनों में पैसा आएगा, निर्माण कार्य चल रहा है. 554 करोड़ रुपये की लागत वाले जौनपुर मेडिकल कॉलेज को अब तक लगभग 300 करोड़ रुपये मिल चुके हैं.

मिर्जापुर: बिजली सप्लाई का काम अधूरा

मिर्जापुर में मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के नाम से बने मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन हुआ है. मेडिकल कॉलेज में चौबीस घंटे बिजली की सुविधा होनी चाहिए, मगर अभी भी बिजली सप्लाई का काम अधूरा है.

अभी मेडिकल कॉलेज का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था के सहारे ही बिजली की आपूर्ति हो पा रही है. बिजली के कारण पानी सप्लाई का काम भी अभी अधूरा है. मगर बिल्डिंग का काम पूरा हो चुका है. कुल 15 छोटी बड़ी बिल्डिंग बनाई गई हैं.

मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी को लेकर प्रोफेसर मिर्जा राशिद ने बताया, ”देखिए यहां पर मानक के मुताबिक, 50 फैकल्टीज की जरूरत है. उसमें से अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, 45 से 46 (नियुक्त) हो चुके हैं. सुविधाएं ठीक हैं. यह जिला अस्पताल से जुड़ा है, वहां भी सुविधाएं हैं.”

मेडिकल सामग्री, जिसका इस्तेमाल छात्रों की पढ़ाई के लिए होना है, उसकी भी आपूर्ति कर दी गई है. जिलाधिकारी का कहना है कि छात्रों के प्रथम सेमेस्टर को लेकर जितनी सुविधा चाहिए उतनी पूरी हो गई है.

प्रतापगढ़: बिल्डिंग अभी आधी-अधूरी बनी है

प्रतापगढ़ जिले के सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज की बात करें तो जिला अस्पताल में ही मेडिकल कॉलेज की ओपीडी को संचालित किया जा रहा है. मरीजों को मेडिकल कॉलेज की मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग अभी आधी-अधूरी बनी है. मुख्य सड़क से कॉलेज तक जाने वाली सड़क का भी निर्माण नहीं हो पाया है.

आर्य दीपक, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज ने बताया, ”पहले फेज में हमारा सब काम मुकम्मल हो चुका है. जिला अस्पताल का विलय मेडिकल कॉलेज में कर दिया गया है. हमारे पास 345 बेड हैं.”

फतेहपुर: पूरी तरह बनकर तैयार नहीं बिल्डिंग

फतेहपुर जिले में अमर शहीद जोधा सिंह अटैया ठाकुर दरियाव सिंह चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण 8 मार्च 2019 से चालू है, जिसका शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27 फरवरी 2019 को किया था. इस मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य 7 मार्च 2021 तक पूरा होना था.

मगर सच्चाई यह है कि अभी भी मेडिकल कॉलेज पूरी तरह बनकर तैयार नहीं है. 300 बेड वाले इस मेडिकल कॉलेज में आधुनिक उपकरणों और मशीनों द्वारा मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गई है. शहर से आठ किमी दूर नेशनल हाईवे 2 पर स्थित अल्लीपुर गांव के पास इस मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया गया है. बिल्डिंग में अंदर और बाहर फिनिशिंग का काम किया जा रहा है.

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मिनिस्टर रामनरेश अग्निहोत्री ने कहा, ”मेडिकल कॉलेज पूरी तरह खुल गया है, छिटपुट काम जो बचे हैं, वो होते रहेंगे. हम लोग घर बना लेते हैं और प्रवेश कर जाते हैं, उसके बावजूद भी छिटपुट काम करवाते रहते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज चालू हो गया है. मरीज भी पहुंच रहे हैं.”

डॉ आरपी सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में प्रति वर्ष पठन-पाठन के लिए 100 एमबीबीएस सीट की सुविधा इस साल से हो जाएगी, सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं, अभी जिला चिकित्सालय को इसका हिस्सा बनाया गया है और आगे चलकर 500 बेड का चिकित्सालय इसी कैंपस में शुरू किया जाएगा.

एटा: पूरी नहीं बनी बिल्डिंग

यहां के मेडिकल कॉलेज की बिल्डिंग भी अभी पूरी नहीं बनी है. 300 बेड के इस मेडिकल कॉलेज में अभी जिला चिकित्सालय में 100 बेड की ओपीडी सेवा शुरू कर दी गई है. एमबीबीएस छात्रों के लिए लैक्चर रूम, रेजिडेंट डॉक्टरों और प्रोफेसरों के लिए आवास भी लगभग बन कर तैयार हैं, लेकिन जिला चिकित्सालय में बन रहा ट्रॉमा सेंटर अभी निर्माणाधीन है और इसे पूरी तरह से तैयार होने में 2022 के जुलाई-अगस्त तक का समय लगेगा.

हमने जब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और डीन प्रोफेसर राजेश गुप्ता से बात की तो उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज लगभग बनकर तैयार है, केवल फाइनल फिनिशिंग टच रह गया है. उन्होंने कहा कि नीट की काउंसलिंग के बाद 100 छात्र हमें अलॉट होंगे, उसके बाद उनकी पढ़ाई शुरू हो जाएगी.

देवरिया: करीब 80 फीसदी काम ही पूरा हुआ

देवरिया में महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज को जिला अस्पताल से संबद्ध कर चिकित्सीय सेवाएं शुरू कर दी गई हैं. नीट का रिजल्ट आने के बाद काउंसलिंग होने पर यहां 100 सीट पर एडमिशन होगा और एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हो जाएगी.

मेडिकल कॉलेज का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है. जैसे प्रशासनिक भवन, हॉस्टल, अकैडमिक भवन, टाईप 2 आवास, डायरेक्टर आवास, जूनियर रेजिडेंस, सीनियर रेजिडेंस, नर्स हॉस्टल, मल्टीपर्पज हॉल कम्प्लीट हैं. कुछ काम अभी अधूरे हैं. जैसे गर्ल्स हॉस्टल, बॉयज हॉस्टल, हॉस्पिटल भवन अभी 60 से 80 प्रतिशत ही बने हैं.

इस मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉक्टर आनंद मोहन वर्मा के मुताबिक, यहां पर तय मानक के अनुसार 50 पीजी रेजिडेंट, 24 सीनियर रेजिडेंट में से 21 रेजिडेंट नियुक्त कर दिए गए हैं, जो डयूटी कर रहे हैं.

(इनपुट्स: हरदोई से प्रशांत पाठक, जौनपुर से राजकुमार सिंह, मिर्जापुर से सुरेश कुमार सिंह, प्रतापगढ़ से सुनील यादव, देवरिया से राम प्रताप सिंह, एटा से देवेश पाल सिंह और फतेहपुर से नितेश श्रीवास्तव)

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