Chandauli News: नदियों की बायोडायवर्सिटी को कायम रखने और उनमें अच्छी किस्म की मछलियों की मौजूदगी को बरकरार रखने को लेकर मत्स्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत चंदौली जिले में बुधवार को गंगा नदी में तकरीबन 1.4 लाख मछलियों के बीज को छोड़ा गया. इस दौरान चंदौली की जिलाधिकारी ईशा दुहन ने विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में मछुआरों के साथ एक बैठक भी की और उन्हें मछली पालन संबंधित टिप्स भी दिए.
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क्या है रिवर रैचिंग का उद्देश्य?
दरअसल, मछुआरों की मदद और नदियों की बायोडायवर्सिटी को बरकरार रखने के उद्देश्य से रिवर रैचिंग का कार्यक्रम चलाया जाता है. इस कार्यक्रम के अंतर्गत नदियों में मछलियों के बीच छोड़े जाते हैं, ताकि नदियों में अच्छे किस्म की मछलियों की मौजूदगी और नदियों की जैविक विविधता भी बरकरार रहे. इसी कार्यक्रम के तहत चंदौली जनपद के बलुआघाट पर मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जिला प्रशासन द्वारा एक लाख चालीस हजार मत्स्य बीज गंगा नदी मे छोड़े गए.
आपको बता दें कि मछुआरों द्वारा नदियों में लगातार मछलियों के मारे जाने के साथ-साथ प्रदूषण के चलते नदियों में भारतीय मेजर कॉर्प प्रजाति की रोहू, नैन और भाकुर आदि प्रजाति की मछलियों की कमी हो जाती है. इसके चलते नदियों से मछली मार कर अपनी आजीविका चलाने वाले मछुआरों के सामने भी जीवन यापन का संकट उत्पन्न हो जाता है. इसी वजह से गरीब मछुआ समुदाय के व्यक्तियों के आजीविका के मद्देनजर भारतीय मत्स्य प्रजाति की मछलियों के संरक्षण के लिए प्रदेश में रिवर रैंचिंग कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है.
चंदौली की जिलाधिकारी ईशा दुहन ने कहा, “आज जनपद चंदौली के बलुआ घाट पर रिवर रैचिंग कार्यक्रम के तहत लगभग एक लाख 40 हजार मत्स्य बीज को गंगा नदी में सिंचाई के लिए डाला गया है. इसका उद्देश्य यह है कि अच्छी वैरायटी की मछलियां चाहे वो रोहू हो, कतला हो या नयन हो, इन सब का अच्छा उत्पादन हो और जो नदी है उसकी भी बायोडायवर्सिटी बनी रहे. जो हमारे मत्स्य पालक नदी पर आश्रित हैं उनके लिए अच्छी वैरायटी की मछलियां हम डाल सकें.”
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