पीलीभीत में एक तरफ हो रही थी विनीता शुक्ला के अंतिम संस्कार की तैयारी, तभी गड्ढे में फंसा एम्बुलेंस का पहिया और हो गया चमत्कार!

सौरभ पांडेय

11 Mar 2026 (अपडेटेड: 11 Mar 2026, 12:00 PM)

Woman Comes Back to Life Ambulance Jerk: पीलीभीत में डॉक्टरों द्वारा ब्रेन डेड घोषित महिला विनीता शुक्ला को एम्बुलेंस के गड्ढे में गिरने से मिले झटके के बाद दोबारा जिंदगी मिल गई. अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे परिवार में लौटी खुशियां. वहीं विनीता के घर पर उन्हें देखने वालों का तांता लगा हुआ है.

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Woman Comes Back to Life Ambulance Jerk: पीलीभीत जिला कोर्ट में हेड कॉपीइस्ट के पद पर तैनात विनीता शुक्ला को बरेली के एक निजी अस्पताल ने ब्रेन डेड घोषित कर घर ले जाने की सलाह दे दी थी. घर में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. परिजन शव का इंतजार कर रहे थे. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. बरेली से पीलीभीत लाते समय रास्ते में एम्बुलेंस का पहिया एक गहरे गड्ढे में फंस गया. इस दौरान तेज झट्टके से विनीता की थम चुकी सांसों को जैसे संजीवनी मिल गई. जैसे सी विनीता के शरीर में हरकरत हुई घर वालें एम्बुलेंस से ही उन्हें अस्पताल लेकर भागे जहां इलाज के बाद अब उनकी तबीयत बिल्कुल ठीक है. 

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बरेली के अस्पताल ने खड़े कर दिए थे हाथ

विनीता शुक्ला की तबीयत बिगड़ने पर उनके पति कुलदीप शुक्ला ने उन्हें पहले सरकारी और फिर बरेली के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया था. इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा और अंत में यह कहते हुए डिस्चार्ज कर दिया कि 'अब इनमें कुछ नहीं बचा है इन्हें घर ले जाइए.' मजबूरन परिवार ने एम्बुलेंस बुक की और पीलीभीत में रिश्तेदारों को अंतिम विदाई के लिए सूचना दे दी.इस बीच एक चमत्कार तब हुआ जब एम्बुलेंस बरेली के हाफिज़गंज इलाके के पास पहुंची. सड़क पर एक गहरा गड्ढा था जिसमें एम्बुलेंस का पहिया गिरने से गाड़ी को बहुत जोरदार झटका लगा. इस झटके के साथ ही ब्रेन डेड मानी जा रही विनीता के शरीर में अचानक हलचल हुई. परिजनों ने देखा कि विनीता की आँखें खुलीं और शरीर हरकत करने लगा.

पीलीभीत के डॉक्टर ने पहचाना 'स्नेक बाइट' का मामला

आनन-फानन में उन्हें पीलीभीत के न्यूरोसर्जन डॉ. राकेश सिंह के पास लाया गया.डॉ. सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में उन्हें संदेह हुआ कि यह मामला स्नेक बाइट यानी सांप के काटने का हो सकता है जिसमें कई बार शरीर पूरी तरह सुन्न हो जाता है और व्यक्ति मृत जैसा दिखने लगता है. डॉक्टर ने इसी आधार पर एंटी-वेनम इंजेक्शन और अन्य उपचार शुरू किया. 24 घंटे के भीतर विनीता की हालत में सुधार होने लगा.

13 दिन के बाद मिली नई जिंदगी

लखनऊ के विशेषज्ञों से परामर्श और 13 दिनों के गहन उपचार के बाद विनीता अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने घर लौट चुकी हैं. विनीता के घर पर उन्हें देखने वालों का तांता लगा हुआ है. कोर्ट परिसर में भी अपने सहकर्मी के इस पुनर्जन्म पर खुशी का माहौल है.

विनीता के पति कुलदीप शुक्ला ने कहा कि 'हम तो उम्मीद छोड़ चुके थे.घर में सब रो रहे थे.लेकिन उस गड्ढे ने मेरी पत्नी को दोबारा मुझसे मिला दिया. यह भगवान का साक्षात चमत्कार है.वहीं डॉ. राकेश सिंह (न्यूरोसर्जन) ने कहा कि कभी-कभी न्यूरोलॉजिकल स्थिति या स्नेक बाइट में मरीज ब्रेन डेड जैसा लगता है. सही समय पर सही उपचार मिलने से उनकी जान बच गई. अगर वो झटका न लगा होता तो शायद हम उन्हें अस्पताल लाने की सोच भी न पाते.'