Saleem Wastik Visual after Arresting: सोशल मीडिया पर एक्स मुस्लिम एक्टिविस्ट बनकर अपनी पहचान बनाने वाले सलीम वास्तिक का डिजिटल साम्राज्य अब ताश के पत्तों की तरह ढह चुका है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसकी जो तस्वीरें सामने आई हैं उनमें वह बेहद असहाय और तनाव में नजर आ रहा है. चेहरे पर रुमाल बांधे और पुलिस की गिरफ्त में खड़ा सलीम अब उस 31 साल पुराने खूनी अतीत के सामने नतमस्तक है जिससे वह ढाई दशकों तक भागता रहा .
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गिरफ्तारी की तस्वीरें आईं सामने
गाजियाबाद के लोनी स्थित अपने घर से शनिवार सुबह गिरफ्तार किए गए सलीम वास्तिक को पुलिस पूछताछ के लिए थाने ले गई है. सामने आई तस्वीरों में सलीम का चेहरा तनाव और घबराहट से भरा हुआ है. दिल्ली के गोकुलपुरी थाने में उसके खिलाफ अपहरण, रंगदारी और हत्या का मुकदमा दर्ज है.
31 साल पहले की खूनी दास्तान
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 20 जनवरी 1995 को सलीम खान ने दिल्ली के 13 साल के छात्र संदीप बंसल का अपहरण किया था. फिरौती की मांग पूरी न होने पर उसने मासूम की हत्या कर दी. साल 1997 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. लेकिन 2000 में जमानत पर बाहर आते ही वह फरार हो गया. पिछले 25 सालों में उसने सलीम खान से सलीम अहमद और फिर सलीम वास्तिक बनकर लगातार अपनी पहचान बदली.
मौत को मात दी
सलीम वास्तिक हाल ही में तब चर्चा में आया था जब 27 फरवरी 2026 को उस पर दिनदहाड़े 14 बार चाकू से जानलेवा हमला हुआ था. उस हमले में उसने मौत को तो मात दे दी और हमलावरों को पुलिस एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया. लेकिन वह कानून से नहीं बच सका. पुलिस पिछले 25 सालों से उसकी तलाश में जुटी थी.
फरारी का लंबा सफर
गिरफ्तारी के बाद पुलिस की पूछताछ जारी है. छानबीन में पता चला है कि वह शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद जैसे शहरों में अपनी पहचान छुपाकर छिपता रहा. आज जब पुलिस ने उसे लोनी से गिरफ्तार किया तो वह नकाबपोश एक्टिविस्ट का चेहरा उतर चुका है और अब वह तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे अपने गुनाहों का हिसाब देगा.
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