Lalitpur Police News: ललितपुर थाने में तैनात हेड कॉन्स्टेबल जितेंद्र यादव के लिए 24 मार्च का दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा होगा. जितेंद्र यादव को ऑन ड्यूटी बर्खास्त कर दिया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि आरोप था कि उन्होंने नौकरी करते हुए थाने में अपने साथियों को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. वह ना सिर्फ पुलिसकर्मियों से रूटीन बातचीत को रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया करते थे बल्कि क महिला आरक्षी को भी लगातार फोन करके परेशान करते थे. इसके अलावा वह तमाम तरह की भ्रष्टाचार से जुड़ी एक्टिविटी में बिजी रहते थे. लेकिन जैसी ही इन सबकी सूचना बड़े अधिकारियों तक पहुंची जितेंद्र यादव के खिलाफ एक्शन शुरू हो गया और उन्हें अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा.
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जितेंद्र यादव के खिलाफ हुई जांच में ये सब पता चला
जांच में जो तथ्य सामने आए हैं वे चौंकाने वाले हैं. जितेंद्र यादव लिपिक कार्यालय में तैनाती के दौरान पुलिसकर्मियों की लीव फाइल यानी अवकाश पत्रावली आगे बढ़ाने के बदले पैसों की मांग करता था. सबसे गंभीर बात यह है कि वह दफ्तर की सामान्य बातचीत को भी गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड कर लेता था. फिर बाद में इन्हीं रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल अपने ही साथियों को ब्लैकमेल करने और उनका आर्थिक शोषण करने के लिए करता था..
महिला सहकर्मी को परेशान करने का आरोप
जितेंद्र यादव पर विभाग की ही एक महिला सहायक लिपिक को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है. वह अलग-अलग मोबाइल नंबरों से फोन कर उन्हें परेशान करता था और विभाग में उनके खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाकर उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाता था.
वर्दी के पीछे छिपा भ्रष्टाचारी पुलिस वाला
विभागीय जांच में यह भी उजागर हुआ कि जितेंद्र यादव का संपर्क जनपद के कुख्यात अपराधियों से था. वह अपराधियों के साथ मिलकर विवादित जमीनों पर कब्जा कराने के काले धंधे में शामिल था. उसकी ये गतिविधियां पुलिस की गरिमा के पूरी तरह विपरीत थीं. एएसपी कालू सिंह के अनुसार, जितेंद्र यादव के खिलाफ पिछले 4 महीनों से गहन विभागीय जांच चल रही थी. उप्र अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की नियमावली 1991 के नियम-14 के तहत उसे पूर्णतः दोषी पाया गया जिसके बाद सेवा से बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया.
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