Zeeshan and Gulfam Encounter: गाजियाबाद में यूट्यबर सलीम वास्तिक के कार्यालय में घुसकर पेपर कटर से गला रेतने वाले सगे भाई जीशान और गुलफाम पुलिस एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं. छोटे बेटे जीशान और बड़े बेटे गुलफाम के मौत की खबर मिलते ही जब पिता बुनियाद अली अमरोहा से गाजियाबाद पहुंचे तो अपने जवान बेटों की लाश देखकर रो पड़े. जिस पिता ने सोचा था कि उनके बेटे बुढ़ापे का सहारा बनेंगे आज उन्हें उन्हीं बेटों के जनाजे को कंधा देना पड़ रहा है. कैमरे के सामने बात करते हुए बुनियाद अली अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए. उनके शब्द और सिसकियां उस कड़वी सच्चाई को बयां कर रही हैं कि अपराध न केवल कानून तोड़ता है बल्कि हंसते-खेलते परिवार को भी उजाड़ देता है.
ADVERTISEMENT
'सच्चाई तो कुछ है, तभी हुआ एनकाउंटर'
बेटों की मौत पर जब बुनियाद अली से सवाल किया गया तो उन्होंने भारी मन से स्वीकार किया कि उनके बेटों से गलती हुई थी. उन्होंने कहा कि 'सच्चाई तो कुछ है तभी तो पकड़े गए और एनकाउंटर हुआ.' हालांकि एक पिता होने के नाते उनका दिल यह भी कह उठा कि काश उन्हें एनकाउंटर की जगह जेल भेज दिया जाता ताकि अदालत उनके गुनाहों का फैसला करती.
अगर शक होता तो खुद सबक सिखाता
बुनियाद अली ने बताया कि उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अंदेशा नहीं था कि उनके बेटे ऐसे किसी कट्टरपंथी या आपराधिक मामले में शामिल हो सकते हैं. गुस्से और दुख के साथ उन्होंने कहा 'अगर मुझे शक होता तो मैं खुद उनका वो हाल करता जो शायद पुलिस भी नहीं कर पाती.' उन्होंने साफ किया कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए उनके बेटे ही जिम्मेदार थे. वहीं वारदात में इस्तेमाल हुई मोटरसाइकिल के बारे में खुलासा करते हुए पिता ने बताया कि वह उनके भांजे (लड़कों के मामा) के नाम पर थी जिसे लड़के ही चलाते थे और उसकी किस्तें भरते थे. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका भांजा पूरी तरह बेकसूर है और उसे इस मामले से जोड़ना गलत होगा.
5 साल से दिल्ली-NCR में रह रहे थे भाई
जानकारी के मुताबिक, छोटा भाई जीशान पिछले 5 साल से दिल्ली-NCR इलाके में रह रहा था.जबकि बड़ा भाई गुलफाम उससे भी पहले से यहां था. गांव से उनका आना-जाना लगा रहता था.लेकिन उनके मन में क्या चल रहा थ इसकी भनक पिता को कभी नहीं लगी.
ADVERTISEMENT









