हरदोई में पुलिस और SDM की गाड़ियों पर मारे गए पत्थर, बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर भारी बवाल

प्रशांत पाठक

• 07:13 PM • 28 May 2026

Hardoi News: हरदोई के महुआ कोला गांव में गौतम बुद्ध प्रतिमा स्थापना को लेकर बड़ा बवाल हो गया. प्रतिमा हटाने पहुंची पुलिस पर जमकर पथराव और आगजनी हुई. कई पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि प्रशासन ने भारी फोर्स तैनात कर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया.

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उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है. बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के महुआ कोला गांव में गौतम बुद्ध की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर भड़का विवाद अचानक बड़े बवाल, आगजनी और भीषण पथराव में बदल गया. बिना प्रशासनिक अनुमति के रखी गई प्रतिमा को जब पुलिस और प्रशासनिक टीम ने हटाने का प्रयास किया तो ग्रामीण और बाहर से आए उपद्रवी उग्र हो गए. उपद्रवियों ने एसडीएम और पुलिस की गाड़ियों को निशाना बनाते हुए छतों से ताबड़तोड़ पत्थर बरसाए जिससे कई गाड़ियों के शीशे टूट गए और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए.इस दौरान स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि उपद्रवियों ने एक झोपड़ी में आग तक लगा दी. देर रात भारी पुलिस बल और पीएसी ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और पूरे इलाके को सील कर छावनी में तब्दील कर दिया है.

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छतों से बरसाए गए पत्थर

चश्मदीदों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, महुआ कोला गांव में बुधवार को उस समय तांडव मच गया जब पुलिस बल गांव से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. अचानक छतों पर छिपे सैकड़ों लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक टीम पर भारी पथराव शुरू कर दिया. ग्रामीणों ने बताया कि 'बाहर के जितने भी आदमी आए थे सब छतों पर चढ़ गए और वहां से पुलिस पर ईंट-पत्थर चलाने लगे. उन्होंने एसडीएम साहब की और पुलिस की गाड़ियों पर सीधे पत्थर मारे जिससे गाड़ियों के शीशे चकनाचूर हो गए. इसके बाद कहीं आगजनी की गई तो कहीं तोड़फोड़ की गई जिससे पूरी सड़क पत्थरों से पट गई.'

एसडीएम ने दिया था आश्वासन लेकिन जिद पर अड़े रहे उपद्रवी

इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे मौके पर जाकर लोगों को कानून व्यवस्था का हवाला देकर समझा रहे थे. प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 'हम लोग लगातार चर्चा कर रहे थे और मोटिवेट कर रहे थे कि जब तक लीगल परमिशन नहीं मिल जाती तब तक किसी भी महापुरुष या भगवान की प्रतिमा नहीं लगाई जा सकती. एडीएम साहब, एडिशनल एसपी और कई सर्कल्स के सीओ साहिबान ने भी समझाने की पूरी कोशिश की थी. एसडीएम साहब ने यहां तक आश्वासन दिया था कि आप अभी मूर्ति हटवा लीजिए मैं खुद आपकी परमिशन कराकर मूर्ति स्थापित करा दूंगा. लेकिन कुछ बाहरी लोगों द्वारा स्थानीय सीधे-साधे ग्रामीणों को भड़काया और बरगलाया गया जिसके बाद उन्होंने जिद पकड़ी और हल्का पथराव शुरू कर दिया. पुलिस ने समुचित बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित किया.'

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप

गांव के ही एक पीड़ित स्थानीय निवासी ने बाहर से आए लोगों पर माहौल बिगाड़ने और धार्मिक भावनाएं आहत करने का गंभीर आरोप लगाया है. ग्रामीण का कहना है कि 'हमारा मंदिर और जो शिवलिंग था, उसे इन लोगों ने पहले भी एक बार तोड़ दिया था. इस बार भी वे उसे जड़ से हटाने का प्रयास कर रहे थे. काफी संख्या में बुद्धिस्ट विचारधारा के लोग दूसरे जनपदों और पड़ोस के गांवों से आए थे. करीब 100-50 बाहरी आदमी पुलिस की नजरों से बचकर छतों पर आकर रुक गए थे. उन्होंने आकर जबरन अपनी प्रतिमा रख दी और कहा कि यहां से शंकर जी का शिवलिंग हटा दो क्योंकि बुद्ध प्रतिमा के अगल-बगल कोई दूसरा इष्ट नहीं रखा जाता. जब हमारे गांव के चौकीदार और हमने इसका विरोध किया तो उन्होंने उल्टी-सीधी भाषा का प्रयोग किया.'

पुलिस का कड़ा एक्शन

हरदोई पुलिस और प्रशासन अब पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है. घटना के तुरंत बाद पूरे गांव में भारी पुलिस बल और पीएसी की टुकड़ियों को तैनात कर दिया गया है. आला अधिकारियों की मौजूदगी में देर रात तक प्रभावित इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला गया. पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए उपद्रव करने और पत्थरबाजी में शामिल कई मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया है जिनमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं. सोशल मीडिया पर इस बवाल की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं जिसके बाद पुलिस सोशल मीडिया के जरिए भी अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रख रही है.