DM अंजनी सिंह से न्याय मांगने वाले 13 साल के अमिताभ गुप्ता की फरियाद अब भी अधूरी, 72+ घंटे बीट जाने के बाद भी नहीं मिला इंसाफ

अभिषेक वर्मा

• 11:54 AM • 21 Jul 2026

लखीमपुर खीरी में डीएम से घर का ताला खुलवाने की गुहार लगाने वाले 13 साल के अमिताभ गुप्ता को अब तक न्याय नहीं मिला है. संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत के तीन दिन बाद भी ताला नहीं खुला. मामले में UP Tak की टीम ने अमिताभ और उसके परिवार से बातचीत की.

Lakhimpur Kheri Amitabh Gupta Case

Lakhimpur Kheri Amitabh Gupta Case (Photo Enhanced By AI)

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Lakhimpur Kheri Amitabh Gupta Case: लखीमपुर खीरी में अपनी फरियाद लेकर डीएम के पास पहुंचे 13 साल के अमिताभ गुप्ता की समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका है. कक्षा 8 में पढ़ने वाला अमिताभ गुप्ता लखीमपुर सदर तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचा था और उसने जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह से घर का ताला खुलवाने की गुहार लगाई थी. घटना के तीन दिन बाद भी ताला नहीं खुला है और बच्चे को अभी तक न्याय मिलने का इंतजार है. इस पूरे मामले में यूपी Tak की टीम अमिताभ गुप्ता के घर पहुंची और उससे बातचीत की.

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अब तक नहीं खुला ताला

अमिताभ गुप्ता ने संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचकर डीएम अंजनी कुमार सिंह को अपनी समस्या बताई थी. बच्चे ने शिकायत की थी कि उसके घर पर लगा ताला खुलवाया जाए. अमिताभ का कहना है कि उसने अपनी परेशानी को लेकर अधिकारियों से मदद मांगी थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. उसने UP तक से बातचीत में बताया कि 'जिस ताले को खुलवाने के लिए उसने डीएम से गुहार लगाई थी, वह अब भी बंद है. हमें न्याय नहीं मिला है, अगर नहीं मानेंगे तो मुख्यमंत्री के पास जाएंगे.'

घर में क्यों बंद है ताला?

जानकारी के अनुसार अमिताभ गुप्ता सदर कोतवाली क्षेत्र के ईदगाह मोहल्ले का रहने वाला है. उसने संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम को बताया था कि उसके पिता मानसिक रूप से बीमार हैं, जबकि उसकी मां घरों में काम करके परिवार का खर्च चलाती हैं. बच्चे का कहना है कि उसके पैतृक मकान के एक हिस्से पर उसकी रिश्ते की ताई ने ताला लगा रखा है. कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए वह अपनी बात सीधे जिला अधिकारी तक लेकर पहुंचा था.

मां ने क्या कहा?

अमिताभ की मां संध्या गुप्ता ने बताया कि परिवार की ओर से कई बार अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनका बेटा बिना बताए तहसील दिवस में पहुंच गया और उसने डीएम को अपनी शिकायत सौंप दी. संध्या गुप्ता ने कहा, हम कई बार प्रार्थना पत्र दे चुके थे और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी. हमारा बेटा हमारा दर्द नहीं देख पाया, इसलिए वह खुद शिकायत लेकर पहुंच गया.

पुलिस पर लगाया डराने का आरोप

संध्या गुप्ता ने बताया कि मामले में पुलिस अधिकारी भी आए थे. उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें डराने की कोशिश की, जिसके बाद परिवार घबरा गया था. उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और घर चलाने के लिए सभी लोग मिलकर लिफाफे बनाते हैं. उन्होंने कहा, लोग बहुत गरीबी में जी रहे हैं. पूरा परिवार मिलकर लिफाफे बनाता है, जिससे घर का खर्च चलता है. हमारी हालत ऐसी नहीं है कि हम बच्चों को ठीक से पढ़ा सकें.

घर चलाने के लिए संघर्ष कर रहा परिवार

अमिताभ के घर की स्थिति भी परिवार की परेशानी को दिखाती है. वीडियो विजुअल में अमिताभ अपनी मां के साथ लिफाफे बनाता हुआ नजर आया, जबकि उसके बीमार पिता बिस्तर पर लेटे हुए दिखे. घर में लगा ताला भी अब तक नहीं खोला गया है. परिवार का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

अमिताभ का बड़ा सपना

डीएम के सामने अपनी बात रखने वाले अमिताभ गुप्ता ने UP तक से बातचीत में कहा कि वह आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहता है और गरीब लोगों की मदद करना चाहता है. उसने कहा कि हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का हक है. अमिताभ की हिम्मत और अपनी समस्या को लेकर अधिकारियों तक पहुंचने की कोशिश ने लोगों का ध्यान खींचा है. हालांकि, अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और बच्चे की फरियाद कब पूरी होती है.