Lalita Gautam case: उत्तर प्रदेश के मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड के बाद सड़कों पर प्रदर्शन और पुलिस लाठीचार्ज को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. जिलाधिकारी कार्यालय के गेट पर चक्काजाम कर रही भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने हल्के बल का प्रयोग किया था, जिसके बाद पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदर्शन को भड़काने के आरोप तय किए हैं. एसएसपी मेरठ ने भारतीय किसान यूनियन (बीआर अंबेडकर गुट) के कथित राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह भाटी को इस बवाल का मुख्य जिम्मेदार बताया है.
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उन्होंने जानकारी दी कि दिग्विजय सिंह पर नौ अलग-अलग मामलों में मुकदमें दर्ज है, इसके साथ ही वो अमरोहा जिले से जिला बदर भी घोषित हो चुका है. दूसरी तरफ, किसान नेता दिग्विजय सिंह भाटी ने वीडियो जारी कर पुलिस के इन दावों को पूरी तरह झूठा बताया है और खुद को घटना के समय गाजियाबाद में होने का दावा किया है.
एसएसपी मेरठ ने लगाए गंभीर आरोप
मेरठ के कलेक्टेट गेट पर हुए बवाल के बाद एसएसपी मेरठ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने बताया कि इस प्रदर्शन को उग्र बनाने में कुछ आपराधिक तत्वों का हाथ था, जिन्होंने भोले-भाले और नाबालिग लड़कों को भड़काकर चक्काजाम करवाया. पुलिस ने मुख्य रूप से अमरोहा के हसनपुर निवासी दिग्विजय सिंह भाटी का नाम उजागर किया है. एसएसपी के मुताबिक, दिग्विजय सिंह भाटी पर एससी-एसटी एक्ट सहित कुल नौ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से पांच अमरोहा और चार मेरठ में दर्ज हैं. इसके साथ ही पुलिस ने उन्हें अमरोहा जनपद से जिला बदर भी बताया है.
किसान नेता ने दावों को नकारा
पुलिस के इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद दिग्विजय सिंह भाटी ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर एक वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी. उन्होंने दावा किया कि जिस समय मेरठ में यह पूरा प्रदर्शन और लाठीचार्ज हो रहा था, वह मौके पर मौजूद ही नहीं थे. उन्होंने कहा कि 'वह पिछले दिन से गाजियाबाद में हैं और प्रशासन चाहे तो उनकी कॉल डिटेल तथा लाइव फोटो निकालकर जांच कर सकता है.' किसान नेता ने मेरठ कप्तान को खुली चुनौती दी कि यदि इस मूवमेंट में उनकी मौजूदगी का कोई भी फोटो, वीडियो या कॉल रिकॉर्ड मिलता है, तो वह पुलिस की हर कानूनी कार्रवाई को भुगतने के लिए तैयार हैं.
आपराधिक मुकदमों पर छिड़ी नई जंग
दिग्विजय सिंह भाटी ने अपने आपराधिक इतिहास पर बात करते हुए अमरोहा से जिला बदर होने की बात को तो स्वीकार किया, लेकिन मुकदमों की संख्या पर एसएसपी के दावे को गलत बताया. उन्होंने कहा कि उनके ऊपर नौ मुकदमे नहीं हैं, बल्कि उनमें से चार-पांच मुकदमों में अफवाह लगी हुई है और एक-दो मुकदमे बिल्कुल फर्जी दर्ज हैं. उन्होंने मेरठ के शासन-प्रशासन से अपील की है कि उनके खिलाफ या उनके जिला अध्यक्ष मोहित किनगर सहित किसी भी अन्य व्यक्ति के खिलाफ कोई झूठी एफआईआर दर्ज न की जाए. फिलहाल, पुलिस और किसान नेता के इन अलग-अलग दावों के बीच यह मामला काफी गरमा गया है.
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