छात्र आंदोलन से विधानसभा तक…कौन हैं पूजा शुक्ला, जो 2027 से पहले सपा के लिए बन रही हैं बड़ा चेहरा?

यूपी तक

• 01:15 PM • 09 Jul 2026

UP News: समाजवादी पार्टी की युवा नेता पूजा शुक्ला इन दिनों यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. छात्र आंदोलन से पहचान बनाने वाली पूजा शुक्ला अब ब्राह्मण मुद्दों पर सक्रिय होकर सपा के लिए नया चेहरा बनती नजर आ रही हैं.

Google CTA

UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा से चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं. समाजवादी पार्टी (सपा) जहां पिछले कुछ समय से पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ ब्राह्मण वोटरों को साधने की कोशिश करती नजर आ रही है, वहीं लखनऊ की युवा नेता पूजा शुक्ला पार्टी के लिए एक नए ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उभर रही हैं. छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाली पूजा शुक्ला अब धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सक्रियता के जरिए सपा के ब्राह्मण वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही हैं.

यह भी देखें...

17 साल की उम्र में छात्र आंदोलन से राजनीति में कदम रखने वाली पूजा शुक्ला 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुकी हैं. अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले वह लगातार ब्राह्मण मुद्दों को लेकर सक्रिय नजर आ रही हैं.

कौन हैं पूजा शुक्ला?

पूजा शुक्ला लखनऊ की रहने वाली हैं और एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं. उनके पिता प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े हैं. छात्र जीवन से ही वह राजनीति में सक्रिय रही हैं. साल 2017 में उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पूजा शुक्ला पहली बार बड़े राजनीतिक आंदोलन के जरिए चर्चा में आई थीं.

लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाया था. इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई हुई, लाठीचार्ज हुआ और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया. इसी आंदोलन के बाद पूजा शुक्ला एक युवा छात्र नेता के रूप में सामने आईं.

आंदोलन से मिली पहचान, जेल जाने के बाद सपा में एंट्री

पूजा शुक्ला कई मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरती रही हैं. नागरिकता कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शन के दौरान भी वह सक्रिय रहीं और उन्हें जेल जाना पड़ा. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव से मुलाकात की. मुलायम सिंह यादव की छात्र राजनीति से नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति के तहत पूजा शुक्ला को समाजवादी छात्र सभा में जिम्मेदारी दी गई. यहीं से उनकी सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री हुई. इसके बाद चाहे छात्र मुद्दे हों या महिला कर्मचारियों से जुड़े मामले, पूजा शुक्ला लगातार विरोध प्रदर्शनों में नजर आती रहीं.

प्रदर्शन की राजनीति से बनी अलग पहचान

पूजा शुक्ला की राजनीति की सबसे बड़ी पहचान उनका आक्रामक आंदोलनकारी अंदाज रहा है. महिला हेल्पलाइन नंबर 112 से जुड़े कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान भी वह मौके पर पहुंचीं थीं. इस दौरान पुलिस के साथ उनकी बहस और झड़प की तस्वीरें सामने आई थीं. इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी वह सक्रिय दिखाई दीं. बीएलओ से मुलाकात के दौरान उनकी तीखी बातचीत का वीडियो भी चर्चा में रहा था. उनकी राजनीति में जोश और सड़क पर उतरकर विरोध करने की शैली उन्हें अन्य युवा नेताओं से अलग पहचान देती है.

अब ब्राह्मण राजनीति पर फोकस

हाल के दिनों में पूजा शुक्ला समाजवादी पार्टी के लिए ब्राह्मण मुद्दों पर सक्रिय नजर आ रही हैं. अखिलेश यादव भी कई मौकों पर ब्राह्मण समाज और धार्मिक मुद्दों को लेकर अपनी बात रखते रहे हैं.

इसी कड़ी में पूजा शुक्ला शंकराचार्य से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सक्रिय दिखाई दीं. शंकराचार्य द्वारा गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर निकाली जा रही यात्रा के कार्यक्रम में लखनऊ में पूजा शुक्ला की भूमिका चर्चा में रही. कार्यक्रम के लिए लगाए गए पोस्टरों में गौ रक्षा और धर्म से जुड़े संदेश दिखाई दिए, जिसके जरिए सपा की ओर से धार्मिक मुद्दों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश भी नजर आई.

खुशी दुबे मामले में भी रही सक्रिय

पूजा शुक्ला की सक्रियता सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रही है. बिकरू कांड के बाद चर्चा में आईं खुशी दुबे के परिवार से जुड़े मामले में भी उनका नाम सामने आया.

खुशी दुबे की मां की तबीयत खराब होने और आर्थिक परेशानी के दौरान अखिलेश यादव तक परिवार की मदद पहुंचाने में पूजा शुक्ला की भूमिका बताई गई. उन्होंने खुशी दुबे के परिवार और सपा नेतृत्व के बीच संपर्क स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई. इस मामले के जरिए भी पूजा शुक्ला ने ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों पर अपनी सक्रियता दिखाई.

2022 में सपा ने दिया था विधानसभा टिकट

समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में पूजा शुक्ला को लखनऊ उत्तर सीट से उम्मीदवार बनाया था. पार्टी ने यहां अपने वरिष्ठ नेता अभिषेक मिश्रा का टिकट काटकर पूजा शुक्ला को मौका दिया था.

अभिषेक मिश्रा सपा के बड़े ब्राह्मण चेहरों में गिने जाते हैं और अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं. ऐसे में पूजा शुक्ला को टिकट देना पार्टी की नई रणनीति के तौर पर देखा गया था. एक युवा महिला और ब्राह्मण चेहरे के रूप में पूजा शुक्ला पार्टी के समीकरण में फिट बैठती दिखाई दीं.

2027 चुनाव से पहले सपा की ब्राह्मण रणनीति?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट लंबे समय से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं. बीजेपी के मजबूत ब्राह्मण आधार के बीच समाजवादी पार्टी इस वर्ग में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

ऐसे में पूजा शुक्ला जैसे युवा चेहरे को आगे बढ़ाना सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. छात्र राजनीति से निकली पूजा शुक्ला अब धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय होकर 2027 की तैयारी करती नजर आ रही हैं. आने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पूजा शुक्ला समाजवादी पार्टी के लिए ब्राह्मण वोटों को साधने में सफल हो पाती हैं या नहीं.