राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा मोड़! चंपत राय को मिली क्लीन चिट, ट्रस्ट में वापसी की उठी मांग

यूपी तक

• 09:32 AM • 09 Jul 2026

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद में ट्रस्ट की बैठक के दौरान पूर्व महासचिव चंपत राय को शुरुआती जांच में राहत मिलने के बाद कई ट्रस्ट सदस्यों ने उन्हें ईमानदार और निष्कलंक बताया.

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Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर कई अहम बातें सामने आईं. बैठक में मौजूद ट्रस्ट सदस्यों ने उन्हें पूरी तरह ईमानदार और निष्कलंक बताया. इतना ही नहीं, कई ट्रस्टियों ने उनके इस्तीफे को स्वीकार न करने की बात कही और अब कुछ सदस्य उनकी ट्रस्ट में वापसी की मांग भी कर रहे हैं. इस बीच शुरुआती जांच में चंपत राय को राहत मिलने और उनके द्वारा चुप्पी तोड़ते हुए भविष्य में बिंदुवार जवाब देने की बात कहने के बाद यह मामला केवल ट्रस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है.

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चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की बैठक में बदले सुर

राम मंदिर चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट की बैठक आयोजित की गई. बताया गया कि बैठक में चंपत राय के इस्तीफे का मुद्दा उठा. बैठक में मौजूद अधिकांश ट्रस्टियों ने एक स्वर में कहा कि वे उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करना चाहते.

हालांकि, बैठक में वरिष्ठ ट्रस्टी और विधि विशेषज्ञ के. परासरण ने ट्रस्ट के उपनियमों (By-laws) का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई ट्रस्टी स्वेच्छा से इस्तीफा दे देता है, तो वह स्वतः प्रभावी माना जाता है. इसके बाद कृष्ण मोहन को ट्रस्ट के महासचिव का दायित्व सौंप दिया गया.

ट्रस्ट सदस्यों ने बताया ईमानदार और निष्कलंक

बैठक के बाद ट्रस्ट के कई सदस्यों और संतों ने सार्वजनिक रूप से चंपत राय का समर्थन किया. ट्रस्टी कमल नयन दास ने कहा कि सभी ट्रस्टियों की इच्छा थी कि उनका इस्तीफा स्वीकार न किया जाए.

उन्होंने कहा कि चंपत राय ने अपना पूरा जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण के लिए समर्पित किया है. उनके अनुसार, चंपत राय की ईमानदारी, कार्यनिष्ठा और समर्पण पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. निर्मोही अखाड़े से जुड़े संतों ने भी कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों ने सर्वसम्मति से चंपत राय के प्रति अपना विश्वास जताया.

पहले विरोध, फिर समर्थन... ट्रस्ट के भीतर बदले रुख पर उठे सवाल

चर्चा इस बात को लेकर भी हो रही है कि जिन ट्रस्ट सदस्यों के बारे में पहले यह कहा जा रहा था कि वे चंपत राय के कामकाज से असंतुष्ट हैं और चाहते थे कि वह पद छोड़ दें, वही सदस्य अब सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं.

बैठक के दौरान कई सदस्यों ने न केवल उनका बचाव किया बल्कि उन्हें दोबारा ट्रस्ट में जिम्मेदारी देने की भी मांग की. इस बदले रुख को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं.

चंपत राय ने कहा- समय आने पर दूंगा हर सवाल का जवाब

चंपत राय ने पूरे विवाद के बीच एक पत्र जारी किया है. पत्र में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर वह सभी आरोपों का क्रमवार और बिंदुवार जवाब देंगे. फिलहाल उन्होंने पूरे मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है.

जांच में राहत, लेकिन अनिल मिश्रा पर बढ़ सकता है दबाव

प्रारंभिक जांच में चंपत राय को राहत मिलने की चर्चा है. वहीं दूसरी ओर ट्रस्ट से जुड़े सदस्य अनिल मिश्रा पर जांच का दायरा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, अयोध्या पुलिस की ओर से अनिल मिश्रा को नोटिस भेजा गया है और उनसे पूछताछ की जा सकती है. माना जा रहा है कि अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी. हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

चढ़ावा विवाद के बाद लगातार बढ़ी राजनीतिक हलचल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का भी विषय बन गया है. विपक्ष ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए, जिसके बाद ट्रस्ट की ओर से जांच प्रक्रिया शुरू की गई.

अब ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय के समर्थन और शुरुआती जांच में राहत मिलने के बाद राजनीतिक बहस का नया दौर शुरू हो गया है. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े नामों की भी चर्चा

चर्चाओं में यह भी सामने आया कि राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे. बताया जा रहा है कि विभिन्न स्तरों पर लगातार बैठकों और संवाद के बाद ट्रस्ट की बैठक हुई, जिसमें चंपत राय को लेकर एकमत राय सामने आई. हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है.

अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल शुरुआती जांच में चंपत राय को राहत मिलने की चर्चा है, लेकिन पूरे मामले की अंतिम तस्वीर अभी सामने आनी बाकी है. अंतिम जांच रिपोर्ट में किन लोगों की भूमिका तय होती है, किसके खिलाफ कार्रवाई होती है और ट्रस्ट आगे क्या फैसला लेता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है. वहीं चंपत राय द्वारा भविष्य में दिए जाने वाले विस्तृत जवाब का भी इंतजार किया जा रहा है.

राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब केवल जांच का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक, धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर भी व्यापक चर्चा का मुद्दा बन चुका है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और ट्रस्ट के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे.