UP News: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव तथा झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है. विवाद की वजह एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट बनी, जिसमें राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे टिन्नू यादव का नाम अखिलेश यादव से जोड़ने का दावा किया गया. इस पोस्ट को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा रीपोस्ट किए जाने के बाद अखिलेश यादव ने इसे झूठा, मानहानिकारक और राजनीतिक साजिश बताते हुए पोस्ट हटाने की चेतावनी दी. जब पोस्ट नहीं हटाई गई तो समाजवादी पार्टी ने प्रदेश के कई जिलों में एफआईआर के लिए तहरीर दी और पार्टी के लीगल सेल की ओर से मानहानि का कानूनी नोटिस भी भेज दिया.
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क्या है पूरा मामला?
पूरा विवाद एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच सैकड़ों फोन कॉल हुए थे और दोनों के बीच संबंध होने का संकेत दिया गया. इस पोस्ट में करीब 980 कॉल होने का दावा भी किया गया.
हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए अब तक कोई आधिकारिक कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) या अन्य प्रमाण सार्वजनिक नहीं हुए हैं. इसके बावजूद बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए अपनी टिप्पणी भी जोड़ दी. इसी के बाद यह मामला तेजी से राजनीतिक विवाद में बदल गया.
टिन्नू यादव का नाम क्यों बना विवाद की वजह?
टिन्नू यादव का नाम अयोध्या के चर्चित राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के मुख्य आरोपियों में सामने आया है. ऐसे में जब सोशल मीडिया पर टिन्नू यादव का नाम अखिलेश यादव के साथ जोड़ने की कोशिश की गई तो समाजवादी पार्टी ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और झूठा प्रचार बताया. अखिलेश यादव ने इसे अपनी छवि खराब करने की कोशिश करार देते हुए तुरंत प्रतिक्रिया दी.
अखिलेश यादव ने दी 10 मिनट की चेतावनी
पोस्ट वायरल होने के बाद अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लंबा बयान जारी किया. उन्होंने लिखा कि सांसद होने के नाते जितने विशेषाधिकार सत्ता पक्ष के सांसदों को प्राप्त हैं, उतने ही विपक्ष के सांसदों को भी हैं.
उन्होंने निशिकांत दुबे को 10 मिनट के भीतर पोस्ट हटाने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. साथ ही उन सभी लोगों को भी चेतावनी दी गई जिन्होंने इस कथित पोस्ट को साझा किया था. अखिलेश यादव ने सार्वजनिक माफी मांगने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने की बात भी कही.
निशिकांत दुबे का पलटवार
अखिलेश यादव की चेतावनी के बाद भी निशिकांत दुबे ने पोस्ट हटाने के बजाय जवाबी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि "जल्दी करिए... इतना परेशान क्यों हैं? प्रश्न ही तो पूछा है." इसके साथ ही उन्होंने 1990 में रामभक्तों पर गोली चलाए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वह भी अदालत जाएंगे. इस जवाब के बाद दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर विवाद और तेज हो गया.
समाजवादी पार्टी का कानूनी मोर्चा
अखिलेश यादव की चेतावनी के बाद समाजवादी पार्टी ने पूरे प्रदेश में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी.
लखनऊ के हजरतगंज थाने में एसपी नेता मनोज काका ने तहरीर दी.
अयोध्या में पवन पांडे ने शिकायत दर्ज कराई.
इटावा (सैफई) समेत प्रदेश के कई जिलों में सपा नेताओं ने निशिकांत दुबे और संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े लोगों के खिलाफ एफआईआर की मांग करते हुए तहरीर दी.
पार्टी के लीगल सेल की ओर से अधिवक्ता कन्हैया लाल पाल ने निशिकांत दुबे को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा.
नोटिस में अखिलेश यादव के खिलाफ कथित दुर्भावनापूर्ण सामग्री प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए मानहानि का दावा किया गया है.
बीजेपी की रणनीति पर उठे सवाल
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े इस विवाद में इतनी सक्रिय भूमिका क्यों निभाई.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच बीजेपी अब नया नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश कर रही है. फिलहाल टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच किसी संबंध का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है.
राम मंदिर प्रकरण पर सीएम योगी का कांग्रेस-सपा पर हमला
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े मामले में चोरी सामने आने के बाद समय रहते कार्रवाई की गई और दोषियों के खिलाफ कदम उठाए गए. लेकिन वक्फ संपत्तियों के नाम पर हजारों एकड़ सरकारी और गरीबों की जमीन पर कब्जे होते रहे, तब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने कभी आवाज नहीं उठाई. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जब वक्फ संपत्तियों को नियमबद्ध करने की कोशिश की गई तो विपक्ष ने उसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहता है कि वक्फ के नाम पर लूट जारी रहे और गरीबों की जमीन पर कब्जा होता रहे.
चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ा नया राजनीतिक मोर्चा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी रिपोर्ट आने और ट्रस्ट की बैठक के बाद अनिल मिश्रा और चंपत राय की भूमिका को लेकर भी लगातार राजनीतिक बयानबाजी जारी है. इस बीच अब बहस केवल चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि सोशल मीडिया पोस्ट, मानहानि, एफआईआर और अदालत तक पहुंच गई है.
फिलहाल यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. आने वाले दिनों में अदालत और पुलिस की कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी, जबकि बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.
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