UP Politics: पूर्वांचल की राजनीति में मऊ एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है. मुख्तार अंसारी के बेटे और मऊ सदर से सुभाषपा के विधायक रहे अब्बास अंसारी की समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव के साथ मुलाकात ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है. दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीर सामने आने के बाद मऊ की सियासत में अब्बास अंसारी की संभावित राजनीतिक रणनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है.
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मंच पर साथ दिखे धर्मेंद्र यादव
बताया जा रहा है कि यह घटनाक्रम मऊ के मधुबन क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आया. कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, गाजीपुर से सांसद अफजाल अंसारी और अब्बास अंसारी एक ही मंच पर मौजूद थे. कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब धर्मेंद्र यादव रवाना होने लगे तो अब्बास अंसारी ने उनसे गले मिलकर उनका अभिवादन किया. इस तस्वीर के सामने आने के बाद पूर्वांचल की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. वहीं पत्रकारों से बातचीत के दौरान अब्बास अंसारी ने कहा कि चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना, इसका फैसला जनता करेगी.
सपा में वापसी की अटकलों को मिला बल
जेल से बाहर आने के बाद अब्बास अंसारी लगातार समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों और दफ्तरों में नजर आ रहे हैं. इससे उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने या सपा के साथ राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बीच अफजाल अंसारी ने भी मुख्तार अंसारी को देवता बताते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी अब्बास अंसारी को टिकट देती है तो मऊ की जनता उन्हें जरूर जिताएगी. अंसारी परिवार की इस क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ और जनाधार को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.
चुनावी मुकाबले पर टिकी सबकी नजर
अब्बास अंसारी की पहचान केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों का अनुभव उन्हें एक मजबूत दावेदार बना सकता है. दूसरी ओर, भाजपा की ओर से मऊ सदर सीट पर एके शर्मा को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चाएं भी चल रही हैं. ऐसे में यदि आगामी चुनाव में अब्बास अंसारी को समाजवादी पार्टी का टिकट मिलता है तो मऊ सदर सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है. फिलहाल दोनों पक्षों की रणनीतियों और संभावित उम्मीदवारों पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है.
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