Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी का बड़ा बयान सामने आया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वे किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या गलत कार्य में शामिल नहीं हैं. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ मामलों में असावधानी और कार्यप्रणाली से जुड़ी कमियां जरूर रही हैं, जिसके कारण विवाद खड़ा हुआ.
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गोविंद देवगिरी ने कहा कि चंपत राय ने राम मंदिर निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया है और उनके इरादों पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की गलती और किसी गलत काम में शामिल होने के बीच अंतर समझना जरूरी है.
'चंपत राय भ्रष्टाचार में शामिल नहीं, लेकिन असावधानी जरूर हुई'
गोविंद देवगिरी ने चंपत राय के बचाव में कहा कि उन्हें निर्दोष कहने का मतलब यह है कि उनके मन में किसी प्रकार का गलत उद्देश्य नहीं था और वे किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालते समय कुछ प्रशासनिक कमियां रह सकती हैं. उनके अनुसार, चंपत राय का स्वभाव ऐसा रहा है कि वे कई कामों की जिम्मेदारी खुद संभाल लेते थे और हर चीज पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते थे. इसी वजह से कुछ जगहों पर निगरानी में कमी रह गई. उन्होंने कहा कि यह असावधानी और कार्य पद्धति की कमी हो सकती है, लेकिन इसे भ्रष्टाचार से जोड़ना सही नहीं होगा.
'अहंकारी नहीं, लेकिन अपनी बात पर अड़े रहते हैं'
जब चंपत राय के स्वभाव को लेकर सवाल पूछा गया कि क्या उनका अहंकार इस पूरे मामले की वजह बना, तो गोविंद देवगिरी ने "अहंकार" शब्द के इस्तेमाल से असहमति जताई.
उन्होंने कहा कि चंपत राय निश्चित रूप से जिद्दी स्वभाव के हैं और कई बार अपनी बात पर अड़े रहते हैं. हालांकि ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने कभी किसी की बात नहीं सुनी. कई मामलों में उन्होंने दूसरों के सुझावों को स्वीकार किया, लेकिन कुछ मामलों में वह अपनी सोच के अनुसार ही आगे बढ़े. उन्होंने कहा कि यह उनके स्वभाव का हिस्सा है, जिसे अहंकार कहना उचित नहीं होगा.
SIT रिपोर्ट और चंपत राय को मिली क्लीन चिट पर बयान
राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी जांच को लेकर पूछे गए सवाल पर गोविंद देवगिरी ने कहा कि जांच रिपोर्ट में चंपत राय का नाम दोषी के रूप में सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की बैठक में दो लोगों के इस्तीफे स्वीकार किए गए और उन्हें भविष्य में ट्रस्ट से बाहर रखने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर चंपत राय को लेकर ट्रस्ट का विश्वास कायम है और उन्हें पूरी तरह से क्लीन चिट मिली है.
'79 लाख रुपये मिलने के बावजूद इसे सिर्फ लापरवाही माना'
इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि यदि चंपत राय के कार्यकाल में इतनी बड़ी चोरी हुई और करीब 79 लाख रुपये नकद बरामद हुए, तो क्या इसे उनकी जिम्मेदारी नहीं माना जाना चाहिए?
इस पर गोविंद देवगिरी ने कहा कि जिम्मेदारी और अपराध में अंतर होता है. उन्होंने कहा कि चंपत राय की नीयत पर कोई संदेह नहीं है. हालांकि उन्होंने यह स्वीकार किया कि निगरानी व्यवस्था में कमी और असावधानी जरूर रही. उन्होंने कहा कि बड़े संस्थानों में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपने आसपास के लोगों के कामकाज पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए, जो इस मामले में नहीं हो पाया.
'करोड़ों लोगों की आस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई'
राम मंदिर से जुड़े विवाद के कारण लोगों की भावनाओं पर पड़े प्रभाव को लेकर गोविंद देवगिरी ने कहा कि इस मामले से लोगों के मन में कुछ आशंकाएं जरूर पैदा हुई हैं.
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इस मुद्दे को बड़ा विवाद बनाने की कोशिश की और अविश्वास का माहौल बनाया. लेकिन ट्रस्ट का विश्वास है कि बेहतर काम और पारदर्शी व्यवस्था के जरिए लोगों का भरोसा फिर से मजबूत किया जाएगा.
CCTV फुटेज और चोरी की घटनाओं पर दिया जवाब
जब उनसे पूछा गया कि एसआईटी जांच में 45 दिनों के सीसीटीवी फुटेज में 70 चोरी की घटनाओं की बात सामने आई है और कई पुराने फुटेज ओवरराइट या डिलीट हो चुके थे, तो उन्होंने कहा कि गलतियां हर जगह हो सकती हैं, लेकिन सुधार के प्रयास महत्वपूर्ण होते हैं. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अब व्यवस्था को और मजबूत करेगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने.
ट्रस्ट में CEO नियुक्त करने की तैयारी
आगे की व्यवस्था को लेकर गोविंद देवगिरी ने बताया कि ट्रस्ट पहले से ही चाहता था कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक योग्य CEO नियुक्त किया जाए.
उन्होंने कहा कि इसके लिए एक समिति बनाई गई है, जो तीन नामों का सुझाव देगी. इसके बाद ट्रस्ट उनमें से किसी एक व्यक्ति का चयन करेगा. CEO की जिम्मेदारी प्रशासनिक और ब्यूरोक्रेटिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू करने की होगी.
कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी पर भी दिया जवाब
जब उनसे पूछा गया कि क्या कोषाध्यक्ष होने के नाते उनकी भी जिम्मेदारी बनती है, तो गोविंद देवगिरी ने कहा कि निश्चित रूप से जिम्मेदारी बनती है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि हुंडी (दान पेटी) से जुड़े मामले में उनकी सीधी भूमिका नहीं थी. उन्होंने कहा कि उनका काम बैंक खातों में जमा धन और उसके खर्च की निगरानी करना था. हुंडी का दैनिक संचालन स्थानीय न्यासियों की जिम्मेदारी थी. उन्होंने कहा कि हुंडी व्यवस्था से जुड़ा SOP (Standard Operating Procedure) भी अनिल मिश्रा द्वारा तैयार किया गया था और उन्हें इसकी जानकारी बाद में मिली.
माफी मांगने के सवाल पर नहीं दिया सीधा जवाब
इंटरव्यू के अंत में जब उनसे पूछा गया कि क्या चंपत राय या अन्य लोगों को इस मामले में लोगों से माफी मांगनी चाहिए, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया.
इसके बाद बातचीत समाप्त हो गई. गोविंद देवगिरी ने पूरे मामले में एक बार फिर यही दोहराया कि ट्रस्ट व्यवस्था को सुधारने और लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए आगे बेहतर काम करेगा.
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