Lalita Gautam Murder Case: उत्तर प्रदेश के मेरठ में बीए छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड अब सिर्फ हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है. इंसाफ की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की हिरासत और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय का एक वायरल वीडियो पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. वायरल वीडियो में SSP अविनाश पांडेय पुलिस वाहन के पास पहुंचकर हिरासत में लिए गए युवक रवि गौतम को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ बाहरी और अराजक तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे. इस पूरे मामले में प्रदर्शनकारियों और पुलिस प्रशासन की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं.
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क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या से जुड़ा है. बताया जा रहा है कि 15 मई को ललिता अचानक लापता हो गई थीं. परिवार ने अगले दिन यानी 16 मई को थाने में उनकी गुमशुदगी की सूचना दी थी. इसके बाद 17 मई को ललिता का शव मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के एक गन्ने के खेत से बरामद हुआ. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
जांच के दौरान पुलिस ने दो अन्य लोगों के नाम भी सामने आने का दावा किया, जिन पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया गया. पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई. हालांकि, ललिता के परिवार और दलित समाज के लोगों का आरोप था कि पुलिस ने मामले में पूरी और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की. इसी मांग को लेकर बुधवार को बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करने पहुंचे.
कलेक्ट्रेट जाने की कोशिश, प्रदर्शनकारियों को रोका गया
ललिता गौतम को न्याय दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी पहले कमिश्नरी चौराहे के पास इकट्ठा हुए. इसके बाद नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने लगे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग रखना चाहते हैं. लेकिन पुलिस ने कलेक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर दिया और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया. आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया.
SSP के थप्पड़ वाला वीडियो वायरल, उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें SSP अविनाश पांडेय पुलिस वाहन के पास जाते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पुलिस वाहन में मौजूद युवक रवि गौतम को SSP ने थप्पड़ मारा. इसके बाद वाहन का दरवाजा बंद कर दिया गया. वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने सवाल उठाए कि अगर कोई व्यक्ति पुलिस हिरासत में है तो उसके साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया. सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर बहस तेज हो गई है और विपक्षी दलों ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.
रवि गौतम ने पुलिस ने लगाए गंभीर आरोप
हिरासत में लिए गए रवि गौतम ने खुद को वकील बताया है. पुलिस का कहना है कि पुलिस वाहन के अंदर रवि गौतम ने अपने गमछे से खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी.
पुलिस के मुताबिक, मौके पर मौजूद जवानों ने समय रहते उसे रोक लिया. इसके बाद SSP द्वारा थप्पड़ मारने वाला वीडियो सामने आने से मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया.
SSP अविनाश पांडेय का पक्ष- बाहरी तत्वों ने बिगाड़ा माहौल
मेरठ SSP अविनाश पांडेय ने पूरे मामले पर पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा कि ललिता गौतम हत्याकांड में मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. उन्होंने दावा किया कि परिवार पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट था और जांच प्रक्रिया लगातार चल रही थी. SSP का आरोप है कि कुछ बाहरी और अराजक तत्व प्रदर्शन में शामिल होकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों को सड़क जाम करने के लिए उकसाया, जिससे आम लोगों को परेशानी हुई.
पुलिस ने बताए पांच लोगों के नाम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए पांच लोगों की पहचान की गई है. पुलिस का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं.
पुलिस ने बताया कि इनमें एक व्यक्ति दूसरे जिले से आया था और उसके खिलाफ पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई हो चुकी है. वहीं एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ नोएडा में मुकदमा दर्ज होने की बात कही गई. पुलिस ने दिग्विजय सिंह भाटी नाम के व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच शुरू करने की बात कही है. इसके अलावा पुलिस ने रवि गौतम पर भी प्रदर्शनकारियों को भड़काने का आरोप लगाया है.
पुलिस का दावा- आंदोलन को भड़काने का प्रयास किया गया
मेरठ पुलिस का कहना है कि कुछ लोगों ने परिवार को आंदोलन तेज करने के लिए उकसाया. पुलिस ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का भी दावा किया है, जिसमें मृतका के भाई को पैसे और लाइसेंस का लालच देकर आंदोलन बढ़ाने की बात सामने आने की बात कही गई है. पुलिस के अनुसार, इस ऑडियो की जांच की जा रही है और मामले में आगे मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है.
विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- प्रदर्शन का अधिकार है
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस पर निशाना साधा है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की. विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है और पुलिस को संयम बरतना चाहिए.
वहीं पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और किसी को भी सड़क जाम कर आम लोगों को परेशान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
वायरल वीडियो और जांच पर टिकी नजर
ललिता गौतम हत्याकांड अब हत्या की जांच से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई, हिरासत में व्यवहार और वायरल वीडियो को लेकर बड़ा मुद्दा बन गया है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि वायरल वीडियो की जांच में क्या सामने आता है, प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस के दावों में सच्चाई किसके पक्ष में जाती है और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है.
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