SC का सख्त आदेश! मेरठ में स्कूल-अस्पताल समेत 44 अवैध बिल्डिंग्स 2 महीने के अंदर होंगी जमींदोज, सीलिंग के बाद अब डिमोलिशन की बारी

संजय शर्मा

09 Apr 2026 (अपडेटेड: 09 Apr 2026, 04:13 PM)

Meerut Illegal Construction News: मेरठ के शास्त्री नगर में बने अवैध निर्माणों को ढहाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2 महीने का समय दिया है. कोर्ट ने कहा कि कानून का राज बनाए रखने के लिए यह सख्त कदम जरूरी है.

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मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) और आवास विकास परिषद के क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने शास्त्री नगर इलाके में अवैध निर्माणों को दो महीने के भीतर ध्वस्त करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने दो टूक कहा कि यह स्थिति राज्य सरकार की समय पर कार्रवाई न करने का नतीजा है.

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'कानून के राज से आंखें नहीं मूंद सकते'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और आवास विकास परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. पीठ ने टिप्पणी की, "यह मामला सिर्फ उत्तर प्रदेश के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए आंखें खोलने वाला है. अगर राज्य सरकारें अपना काम समय पर करें, तो ऐसी नौबत ही न आए." कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित जगह पर व्यावसायिक गतिविधियां और स्थाई निर्माण कैसे होने दिए गए, यह जांच का विषय है.

44 व्यावसायिक संपत्तियों पर चलेगा बुलडोजर

चिह्नित किए गए 859 अवैध निर्माणों में से 44 ऐसी संपत्तियां हैं जिनमें बैंक, स्कूल और चिकित्सालय जैसी सार्वजनिक सुविधाएं चल रही हैं. प्रशासन ने इनकी पहचान कर इन्हें सील कर दिया है. जस्टिस पारदीवाला ने स्पष्ट किया कि कोर्ट की चिंता उन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर है, न कि अवैध रूप से चल रहे बिजनेस को लेकर. कोर्ट ने इन 44 संपत्तियों को डिमोलिश करने के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है.

आवास विकास परिषद को कड़ी फटकार

इससे पहले, उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने स्थानीय अव्यवस्था का हवाला देकर डिमोलिशन पर रोक लगाने की कोशिश की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में परिषद के अध्यक्ष को कड़ी फटकार लगाते हुए व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था. कोर्ट ने पूछा कि जिस जमीन को सकारात्मक उद्देश्यों के लिए खाली रखा गया था, वहां कमर्शियल कॉम्प्लेक्स कैसे खड़े हो गए?

दो महीने की दी गई डेडलाइन

सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन को दो महीने के भीतर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का समय दिया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन संस्थानों को सील किया गया है, उनके मालिक अपना सामान निकालने के लिए प्रशासन को अर्जी दे सकते हैं. प्रशासन उन्हें कानून के दायरे में रहकर मौका देगा. मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की गई है.