शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई सीलिंग की कार्रवाई ने कोहराम मचा दिया है. यूपी Tak की टीम ने ग्राउंड जीरो पर उन महिलाओं से बात की, जिनकी दुकानें साल कर दी गई हैं. रोजी-रोटी छिनने के गम में डूबी इन महिलाओं का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी ठोस विकल्प के उन्हें सड़क पर खड़ा कर दिया है.
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'कहां जाएं, क्या खाएं?'
एक पीड़ित महिला ने रोष जताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें बार-बार निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पहले जिस कॉम्प्लेक्स में उनकी दुकान थी, वहां से उन्हें हटना पड़ा. उसके बाद उन्होंने बड़ी मुश्किल से दूसरे कॉम्प्लेक्स में किराये पर दुकान ली, लेकिन अब उसे भी सील कर दिया गया है. महिलाओं का सीधा सवाल है- "हमारा घर कौन पालेगा?" उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जब ये बिल्डिंग्स बन रही थीं, तब अधिकारी कहां थे?
स्कूलों की सीलिंग से बच्चों का भविष्य अधर में
सीलिंग की इस कार्रवाई में केवल दुकानें ही नहीं, बल्कि स्कूल भी चपेट में आए हैं. एक महिला ने रोते हुए बताया, "कल ही बच्चे का 40 हजार रुपये देकर एडमिशन कराया था, आज स्कूल सील हो गया." स्कूल बंद होने से उन अभिभावकों की रातों की नींद उड़ गई है, जिन्होंने अभी-अभी नए सत्र की फीस जमा की थी. महिलाओं ने सवाल उठाया कि क्या स्कूल मैनेजमेंट उनकी फीस वापस करेगा और अब सत्र के बीच में बच्चे कहां जाएंगे?
'अधिकारियों की लापरवाही की सजा जनता क्यों भुगते?'
पीड़ित महिलाओं ने सिस्टम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कॉलोनी जब कटती है, तब अधिकारी पैसे लेकर उसे बनने देते हैं. उन्होंने कहा कि आज भी रिंग रोड की तरफ कई अवैध कॉलोनियां बन रही हैं, जिन्हें बाद में 'अप्रूव' कर दिया जाएगा. व्यापारियों का कहना है कि वे निर्दोष हैं और 40 साल पुराने विवाद की गूंज आज उनके परिवारों को बर्बाद कर रही है.
राहत के वादे निकले खोखले?
महिलाओं ने सरकार और प्रशासन द्वारा दी गई राहत की खबरों को भी नकारा. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जिन 22 दुकानदारों को दूसरी जगह दुकान देने का वादा किया गया था, उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला. ऐसे में उन्हें डर है कि उनके साथ भी केवल कागजी वादे ही किए जा रहे हैं. बाजार में अब सन्नाटा पसरा है और पीड़ित महिलाएं इसे श्मशान भूमि की उपमा दे रही हैं.
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