सपा नेता दिग्विजय भाटी ने मेरठ के एसएसपी रहे अविनाश पांडे और SOG इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर आरोपों की बारिश कर दी है. भाटी ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि डेढ़ घंटे तक उन्हें और उनके साथी मोहित जाटव को अविनाश पांडे और पुलिसवालों ने टॉर्चर किया. दोनों ने अविनाश पांडेय और SOG इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ पर एसएसपी ऑफिस और एसओजी दफ्तर में जूतों, लात-घूंसों और लाठियों से बेरहमी से पिटाई करने के आरोप लगाए हैं. इस बीच दिग्विजय भाटी ने सपा विधायक अतुल प्रधान संग प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने आरोप लगाया कि इंस्पेक्टर ने उन्हें 'चोली के पीछे क्या है' गाने पर डांस कराया था.
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दिग्विजय भाटी, ने कहा, "चोली के पीछे क्या है, इसी गाने पर हमें नचवाया जा रहा था." उन्होंने कहा कि एक बार जब उन्होंने डांस किया फिर उसके बाद इंस्पेक्टर ने कहा कि उसने देखा नहीं फिर से नाचो. ये सब बताते हुए दिग्विजय भाटी इमोशनल हो गए और उनका गला रुंध गया. फिर बगल में थे सपा विधायक अतुल प्रधान ने उनका हौसला बढ़ाया.
नीचे शेयर किए गए वीडियो में 3 मिनट के बाद देखें डांस वाले आरोप पर दिग्विजय ने क्या कुछ कहा?
भाटी ने और क्या-क्या कहा?
दिग्विजय भाटी ने कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. भाटी का आरोप है कि मेरठ के तत्कालीन SSP अविनाश पांडे उन्हें अपने चैंबर में दलित छात्रा हत्याकांड मामले के लिए बुलाया था. किसान नेता का दावा है कि इस दौरान उनके साथ बर्बरता हुई. आरोप के मुताबिक, SSP अविनाश पांडे ने उन्हें गालियां दीं और जूतों, लात-घूंसों से पीटा. इसके बाद दोनों को SOG के हवाले किया गया. एसओजी ऑफिस में इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ ने पैर बांधकर उल्टा लटकाया और तलवों, कमर तथा पीठ पर फट्टों और लाठियों से पिटाई की. शुक्रवार सुबह दिग्विजय की आंख पर भारी सूजन और चोट के निशान दिखाई दिए.
ADG ने दिए जांच के आदेश
मेरठ के ADG ने हिरासत में हुई पिटाई के मामले में जांच के आदेश दिए हैं.
अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
इस मामले में सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा, "किसान का अपमान, देश का अपमान है! भाजपा ने किसान के मुँह पर लात मरवाकर पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है वो अक्षम्य है. उप्र की भाजपा सरकार द्वारा किसान नेताओं पर थाने में थर्ड डिग्री की मार-पीट करके प्रताड़ना देना दर्शाता है कि हार के डर से वो कितनी बौखलाई है. जिन्हें भाजपा किसानों के आगे ढाल बनाकर साथ में खड़ा करना चाहती थी वो ढाल भी निम्नलिखित कारणों से, किसानों के आक्रोश की आग के कारण मोम की ढाल ही साबित हुई है..."
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