Mathura Labour Protest मथुरा में स्वीटी सुपारी फैक्ट्री के बाहर श्रमिकों का धरना, वेतन भेदभाव, बोनस गड़बड़ी और उत्पीड़न के आरोप

Mathura Workers Protest Sweeti Supari Factory Wage Discrimination Bonus Issue: मथुरा गोविंद नगर थाना क्षेत्र स्थित स्वीटी सुपारी फैक्ट्री के बाहर मंगलवार को श्रमिकों का आक्रोश खुलकर सामने आया.

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Newzo

28 Apr 2026 (अपडेटेड: 28 Apr 2026, 12:51 PM)

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Mathura Labour Protest:  मथुरा गोविंद नगर थाना क्षेत्र स्थित स्वीटी सुपारी फैक्ट्री के बाहर मंगलवार को श्रमिकों का आक्रोश खुलकर सामने आया. फैक्ट्री प्रबंधन पर उत्पीड़न, वेतन में भेदभाव और बोनस में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में श्रमिक धरने पर बैठ गए. महिला श्रमिकों की भी बड़ी भागीदारी रही. कर्मचारियों ने फैक्ट्री गेट के बाहर फर्श बिछाकर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा.

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श्रमिकों का आरोप है कि फैक्ट्री मालिक नए कर्मचारियों को 13 हजार रुपये वेतन देने की बात कर रहा है, जबकि वर्षों से काम कर रहे पुराने श्रमिकों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है. प्रदर्शनकारी श्रमिकों का कहना है कि समान काम के बदले समान वेतन मिलना चाहिए और पुराने कर्मचारियों के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए.

धरने में शामिल सपना तिवारी ने बताया कि वह पिछले 21 वर्षों से फैक्ट्री में कार्यरत हैं, लेकिन लंबे समय की सेवा के बावजूद उन्हें उचित वेतन वृद्धि नहीं मिली. उनका आरोप है कि दो साल पहले लगे नए कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जा रही है, जबकि पुराने श्रमिकों को नजरअंदाज किया जा रहा है.

श्रमिकों ने बोनस को लेकर भी फैक्ट्री प्रबंधन पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि पहले मिलने वाला बोनस बंद कर दिया गया है और पिछले पांच वर्षों का बकाया बोनस भी नहीं दिया गया. कर्मचारियों ने सरकार के श्रम संबंधी निर्देशों को सभी पर समान रूप से लागू करने की मांग की.

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में काम का दबाव भी लगातार बढ़ा है. पहले मशीनों की गति 80 थी, जिसे अब बढ़ाकर 145 कर दिया गया है, लेकिन काम के बढ़े बोझ के अनुपात में वेतन नहीं बढ़ाया गया.

श्रमिकों ने साफ कहा कि जब तक वेतन वृद्धि, बोनस बहाली और समानता की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका धरना जारी रहेगा.

फिलहाल फैक्ट्री के बाहर नारेबाजी के बीच श्रमिक अपने हक की लड़ाई लड़ने पर अड़े हुए हैं.