Ballia News कबाड़ नही, ये दादा का प्यार है, बलिया के रानू ने 50 साल पुरानी एम्बेसडर को फिर दी नई धड़कन, नई पीढ़ी के लिए मिसाल

Ballia Inspiration News: आज की दौड़ती-भागती दुनिया में जब लोग हर साल अपनी गाड़ियां बदल रहे हैं, तब उत्तर प्रदेश के बागी धरती बलिया से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सुकून देने वाली है.

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Newzo

28 Apr 2026 (अपडेटेड: 28 Apr 2026, 12:50 PM)

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Ballia Ranu Pathak Restores 50 Year Old Ambassador Car Family Heritage Story: आज की दौड़ती-भागती दुनिया में जब लोग हर साल अपनी गाड़ियां बदल रहे हैं, तब उत्तर प्रदेश के बागी धरती बलिया से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सुकून देने वाली है. बलिया के युवा समाज सेवी रानू पाठक ने पुरानी यादों को कबाड़ होने से बचा लिया है. उन्होंने अपने दादाजी की लगभग 50 साल पुरानी एंबेसडर कार को फिर से सड़क पर दौड़ा ने लायक बना दिया है.

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यह लाल रंग की चमकती हुई एंबेसडर कर सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि पाठक परिवार की तीन पीढ़ियों की विरासत है. सन 1973 मॉडल की यह कार कभी बलिया की सड़कों की शान हुआ करती थी. वक्त बिता, गाड़ियां बदली और एक समय ऐसा आया कि यह कार अपनी चमक खो बैठी, लेकिन इसे कबाड़ नहीं होने दिया बलिया के युवा समाजसेवी रानू पाठक ने.

रानू पाठक का संकल्प अटूट था. वे इस कार के जरिए अपने दादाजी की यादों को सहेजना चाहते थे. यह राह आसान नहीं था. पूरे 1 साल तक इस कार पर दिन रात काम चला. इंजन की ट्यूनिंग से लेकर शानदार डेंटिंग-पेंटिंग तक, हर एक पुर्जे को दोबारा जिंदा किया गया. नतीजा आज सबके सामने है. यह कार आज की आधुनिक गाड़ियों को कड़ी टक्कर देने को तैयार है.

रानू पाठक ने बताया कि यह मेरे दादाजी की निशानी है जो मेरे लिए किसी बेशकीमती खजाने से काम नहीं है. मैं इसे कबाड़ होने से बचाने का जो संकल्प लिया था वह आज पूरा हुआ है. इसे सड़क पर देखकर जो खुशी मिलती है वह नई लग्जरी गाड़ियों में नहीं है. बताया यह कार उस जमाने में लगभग 35000 रुपए में ली गई थी और आज इस विरासत को बचाने में जितना पैसा लगेगा मैं खर्च करने को तैयार हूं. बताया अब तक इसमें लगभग डेढ़ लाख रुपए खर्च हो चुके हैं. रानू ने बताया कि इसी कार से मेरे पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की बारात गई थी. इस कार से पूरे परिवार की यादें जुड़ी है जिसे आज जीवंत रूप दिया गया है.

अपना अस्तित्व खो चुके इस पुरानी विरासत को फिर से सड़कों पर दौड़ने वाले कार मैकेनिक अशरफ अली ने बताया कि यह कार पूरी तरह से कबाड़ हो चुका था. रानू जी इसे फिर से सड़क पर दौड़ते हुए देखना चाहते हैं. उनके दादा परदादा की यादें इस कार से जुड़ी है और उन्ही यादों के बदौलत पिछले 1 साल से कार को फिर से तैयार किया जा रहा है. बताया इसके कई पार्ट पुर्जे कोलकाता और अन्य राज्यों से मंगवाया गया है, काफी मेहनत के बाद इस कार को सड़क पर चलने लायक बनाया है. बताया यह रानू पाठक की इच्छा शक्ति और हम सब की मेहनत का नतीजा है.

वाकई, रानू पाठक का यह कदम नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल है. यह संदेश देता है की चिझे पुरानी हो सकती है लेकिन जज्बात और विरासत हमेशा नई रहती है.