उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आगामी मानसून सत्र के दौरान सियासी पारा चढ़ने के आसार है. छात्र राजनीति में अपनी सक्रियता दर्ज कराते हुए उत्तर प्रदेशज संयुक्त छात्र संघर्ष उत्तर प्रदेश में बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है. मोर्चा ने मांग की है कि आगामी विधानसभा सत्र जुलाई अगस्त 2026 के दौरान छात्र संघ चुनाव की बहाली और स्कॉलरशिप यानी छात्रवृत्ति कानून के मुद्दे पर सरकार को घेरा जाएगा.
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संयुक्त छात्र मोर्चा के इस ऐलान ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. आपको बता दे कि इसकी आगाज भी आज बलिया से शुरू हो गई है. संगठन का कहना है कि वह इस बार अपनी मांगों को लेकर आरपार की लड़ाई के मूड में है. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता प्रवीण सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि छात्र राजनीति लोकतंत्र की नर्सरी है लेकिन प्रदेश के विश्वविद्यालय और कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव पर लगी रोक से लोकतंत्र कमजोर हो रहा है. प्रवीण सिंह ने मौजूदा भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र संघ चुनाव की बहाली न केवल छात्रों का अधिकार है बल्कि यह कैंपस से निकलकर पूरे देश में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए भी जरूरी है.
छात्रों ने अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में वर्षों से बंद पड़ी छात्र संघ चुनाव प्रक्रिया को तुरंत बहाल किया जाए. छात्रवृत्ति आवंटन में धांधली रोकने और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक कठोर कानून लागू हो. आगामी मानसून सत्र जुलाई अगस्त 2026 के दौरान लखनऊ में होने वाले इस प्रदर्शन के लिए संयुक्त छात्र मोर्चा ने अभी से ही लामबंदी शुरू कर दी है.
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