कसमंडी किला-मस्जिद में नहीं होगी बकरीद की नमाज, लखनऊ प्रशासन ने क्यों लिया ये बड़ा फैसला?

आशीष श्रीवास्तव

26 May 2026 (अपडेटेड: 26 May 2026, 02:02 PM)

Kasmandi Kila Masjid dispute Lucknow: लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी किला-मस्जिद विवाद में प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए बकरीद पर नमाज पर रोक लगा दी है. तनाव की आशंका को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है.

Kasmandi Kila Controversy

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Bakrid Namaz Ban: लखनऊ के ग्रामीण इलाके मलिहाबाद के कसमंडी किला और मस्जिद विवाद में जिला प्रशासन ने कानूनव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एक बेहद बड़ा फैसला लिया है. बकरीद के त्योहार पर किसी भी प्रकार के संभावित तनाव और टकराव को टालने के लिए प्रशासन ने विवादित स्थल पर नमाज अदा करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. इस आदेश के बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और आला प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है. दरअसल यह पूरा विवाद तब गरमाया जब पासी समाज के विभिन्न संगठनों ने इस विवादित स्थल को राजा कंसा का ऐतिहासिक किला बताते हुए इसे पूरी तरह संरक्षित करने और प्राचीन स्मारक घोषित करने की मांग तेज कर दी.

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क्या है पूरा विवाद? 

कसमंडी कला का यह इलाका ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पासी समाज के विभिन्न संगठनों और स्थानीय नेताओं का दावा है कि यह विवादित टीला और स्थल दरअसल महाराजा सुहेलदेव पासी के दौर के प्रतापी राजा कंसा का ऐतिहासिक किला है. पासी समाज का कहना है कि यह उनकी सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है जिसे समय के साथ दबाने की कोशिश की गई.

संगठनों का आरोप है कि किले के अवशेषों और परिसर के भीतर एक पक्ष द्वारा धार्मिक गतिविधियां शुरू कर इसे नया रूप देने का प्रयास किया जा रहा था जिसका उन्होंने पुरजोर विरोध किया. पासी समाज ने सरकार और पुरातत्व विभाग (ASI) से मांग की है कि इस पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर इसे ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाए.

प्रशासन का बड़ा एक्शन

तनाव की सुगबुगाहट और दोनों पक्षों के आमने-सामने आने की आशंका को देखते हुए लखनऊ जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत मोर्चा संभाला. आगामी बकरीद के त्योहार पर शांति व्यवस्था भंग न हो, इसके लिए अधिकारियों ने विवादित स्थल पर सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने या किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. प्रशासन का साफ कहना है कि किसी भी नई परंपरा को शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी और जो स्थल विवादित श्रेणी में है, वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है.

ड्रोन से रखी जा रही नजर

प्रशासनिक फैसले के बाद कसमंडी कला और आस-पास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं. मौके पर कई थानों की पुलिस फोर्स, रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है. उपजिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं और खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. पूरे इलाके और विवादित परिसर की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है ताकि किसी भी शरारती तत्व की गतिविधि पर तुरंत एक्शन लिया जा सके.

दोनों पक्षों से बातचीत जारी

मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं, संभ्रांत नागरिकों और पासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कर रहे हैं. संवाद के जरिए मामले को शांत रखने की कोशिश की जा रही है. अधिकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाले या शांति व्यवस्था को खतरे में डालने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी.