बलिया: यूपी के बलिया में अवैध और मानक विहीन अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने मोर्चा खोल दिया है. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोतवाली क्षेत्र में बीते दो दिनों में आधे दर्जन से अधिक अस्पतालों पर छापेमारी की जिसके बाद अवैध रूप से मानक विहीन अस्पताल संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है.
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आपको बताते चले की बलिया जनपद में बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से कई अल्ट्रासाउंड सेंटर और नर्सिंग होम संचालित किये जा रहे हैं. हाल ही में हुए दो घटनाओं ने बलिया को झकझोर कर रख दिया. इसके बाद लोगों में आक्रोश व्याप्त है. लगातार मांग उठ रही है कि अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित अस्पतालों को सील किया जाए, साथ ही उन डॉक्टरों को जेल भेजा जाए जिनके कारण आए दिन लोगों की मौत हो रही है.
बीते कुछ दिन पहले कोतवाली क्षेत्र स्थित सीएमओ कार्यालय के नाक के नीचे एक निजी पूर्वांचल हॉस्पिटल के नाम से संचालित अस्पताल में एक महिला और उसके दो जुड़वा बच्चों की मौत हो गई थी. परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर हंगामा काटा.जिसके बाद बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया. अभी यहा मामला ठंडा भी नही हुआ था कि कोतवाली क्षेत्र स्थित एक और निजी अस्पताल अपूर्वा नर्सिंग होम में पथरी का ऑपरेशन कराने आई एक महिला की मौत हो गई. यहां भी परिजनों ने जमकर हंगामा काटा.
जिसके बाद परिजनों के तहरीर पर पुलिस ने पांच नामज़द डॉक्टर के खिलाफ संगीत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया. इसके बाद अस्पताल के सभी डॉक्टर फरार चल रहे हैं वहीं मृतिका के परिजन लगातार अस्पताल को सील करने और आरोपी डाक्टरों को जेल भेजने की मांग कर रहे हैं. इन घटनाओं को देखते हुए बलिया के डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने अस्पतालों की जांच के लिए टास्क फोर्स का गठन करने का निर्देश दिया. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार रजिस्टर्ड और अनरजिस्टर्ड अस्पतालों के खिलाफ अभियान चलाकर छापेमारी कर रही.
अस्पतालों की जांच करने पहुंची टीम, संचालकों के बीच जमकर नोक-झोंक
स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जांच टीम में डिप्टी सीएमओ मंजू रानी, ए.के. मिश्रा सर्विलांस प्रभारी, योगेंद्र दास अपर सीएमओ, नायाब तहसीलदार गड़वार और अन्य कर्मचारी शामिल है. अस्पतालों की जांच करने पहुंची टीम और अस्पताल संचालकों के बीच जमकर नोक झोंक भी देखने को मिला रहा है. स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी से अवैध रूप से संचालित और मानक विहीन अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है. इसी कड़ी में अपूर्वा नर्सिंग होम को सील करने पहुंची स्वास्थ्य टीम को किन्ही कारणों से वापस लौटना पड़ा. जिसके बाद कई सवाल खड़े हो गए. फिलहाल छापेमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अभी कोई ऑथेंटिक बयान जारी नहीं किया गया है.
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