Drug Store Strike Ballia: बलिया में ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में केमिस्ट व ड्रगिस्ट ने आज अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं. संगठनों के आह्वान पर हुए इस आंदोलन में व्यापारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजा. दवा विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि बिना पुख्ता जांच, बिना सत्यापित पर्चे और भारी छूट के साथ ऑनलाइन दवाओं की बिक्री जनस्वास्थ्य और उनके रोजगार के लिए खतरा है.
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उत्तर प्रदेश के बलिया में ऑनलाइन दवा प्लेटफार्म्स और ई-फार्मेसी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के तहत आज बलिया जिले में भी केमिस्ट और ड्रगिस्ट ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं. ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स और उत्तर प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आवाहन पर आयोजित एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को बलिया जिले में व्यापक समर्थन मिला. व्यापारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विज्ञापन भी सौंपा है.
दवा विक्रेताओं का आरोप है कि ऑनलाइन दवा प्लेटफार्म की वजह से न सिर्फ उनका व्यापार चौपट हो रहा है बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी बड़ा खिलवाड़ हो रहा है. ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन गंभीर मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है. आरोप लगाया कि बिना किसी पुख्ता जांच और कड़े नियमों के इंटरनेट पर धड़ल्ले से दवाएं बेची जा रही है. बिना किसी वैध और सत्यापित डॉक्टरी पर्चे के दवाओं की धड़ल्ले से बिक्री और होम डिलीवरी की जा रही है जो बेहद खतरनाक है. ऑनलाइन कंम्पनियां अनुचित तरीके से भारी डिस्काउंट देकर बाजार को बिगाड़ रही है. जिससे छोटे और लाइसेंसधारी केमिस्ट्स भुखमरी की कगार पर पहुंच रहा है.
बलिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंह ने आंदोलन पर बात करते हुए कहा की दवा विक्रेता समाज की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का एक अभिन हिस्सा हैं. दवाएं कोई सामान्य किराना या उपभोक्ता वस्तु नहीं है कि उन्हें बिना जांच परख के ऑनलाइन बेच दिया जाए. बिना उचित सत्यापन के दवाओं की ऑनलाइन बिक्री ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों का खुला उल्लंघन है, और यह जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है. उन्होंने आगे कहा कि आंदोलन केवल दवा व्यापारियों के फायदे के लिए नहीं है बल्कि देश के मरीजों की सुरक्षा और लाखों छोटे दवा विक्रेताओं के भविष्य को बचाने की लड़ाई है.
दवा कारोबारी ने सरकार से मांग की है कि जीएसआर 817(E) और जीएसआर 220(E) नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए. उनका आरोप है कि इन नियमों का दुरुपयोग करके विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और क्विक कॉमर्स ऑपरेटर्स दवाओं की अनियंत्रित और अवैध डिलीवरी कर रहा है.
संगठन के पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि कोविड महामारी के दौरान जब सब कुछ बंद था, तब देश के केमिस्टों ने फ्रंटलाइन हेल्थ केयर वर्कर्स की तरह अपनी जान जोखिम में डालकर आम जनता तक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की थी. इसके बावजूद सरकार ऑनलाइन कंपनियों की अवैध गतिविधियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है. दवा विक्रेताओं ने केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की है कि मरीजों की सुरक्षा और लाखों छोटे लाइसेंसधारी केमिस्ट्स और उनके कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाया जाए अन्यथा यह आंदोलन आगे और उग्र रूप ले सकता है.
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