Eyewitness statement Deepika case: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के जलपुरा गांव में करीब विवाहिता दीपिका नागर की संदिग्ध मौत का मामला अब एक नए मोड़ पर आकर खड़ा हो गया है. इस केस में अब दीपिका के पड़ोस में रहने वाले एक चश्मदीद शख्स गुलजार चौधरी का बड़ा बयान सामने आया है, जिन्होंने घटना की रात ठीक क्या हुआ था उसकी सिलसिलेवार कहानी बयां की है.
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रात 12:30 बजे अचानक आई तेज आवाज, नीचे मुंह के बल पड़ी थी दीपिका
चश्मदीद गुलजार चौधरी ने बताया कि घटना वाली रात करीब 12:30 बजे वह अपने घर के अंदर मौजूद थे, तभी अचानक बाहर से एक तेज आवाज सुनाई दी. आवाज सुनकर जब वे दौड़कर अपने घर से बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि सामने वाले घर के ऋतिक की पत्नी दीपिका नीचे जमीन पर पड़ी हुई थीं. गुलजार चौधरी के मुताबिक, जब उन्होंने जाकर देखा तो दीपिका का चेहरा (फेस) पूरी तरह से जमीन की तरफ था और वह वहां लगे लोहे के जाल पर पड़ी हुई थीं.
चिल्लाता हुआ ऊपर से भागा आया पति ऋतिक
गुलजार ने बताया, "जब मैंने उन्हें नीचे पड़ा देखा तो मैंने तुरंत उनको उठाया. उसी समय ऊपर से ऋतिक भी चिल्लाता हुआ और भागता हुआ नीचे आया. ऋतिक ने भी हाथ लगाया और रोते-चीखते हुए मुझसे बोला कि भैया, इनको उठाकर गाड़ी में रखवा दो." इसके बाद गुलजार ने दीपिका को गाड़ी में रखवाने में मदद की.
पहले सैनी और फिर शारदा अस्पताल लेकर भागे
चश्मदीद ने बताया कि वारदात के बाद सबसे पहले ऋतिक बाहर निकला था और उसके थोड़ी देर बाद उसके ससुर बाहर आए. ससुर ने तुरंत गाड़ी की चाबी ली. घायल दीपिका को लेकर सब लोग सबसे पहले उनके ससुर 'मनोज प्रधान' की खुद की गाड़ी में बैठकर निकले. यहां से पहले गाड़ी ऋतिक चलाकर ले गया, लेकिन रास्ते में सैनी हॉस्पिटल पहुंचने पर डॉक्टरों ने देखने से मना कर दिया. इसके बाद वहां से मनोज प्रधान खुद गाड़ी चलाकर दीपिका को शारदा हॉस्पिटल लेकर गए. चश्मदीद ने बताया कि जब वे अस्पताल गए तो सांस चल रही थी या नहीं, इस बारे में वे ठीक से नहीं बता पाएंगे क्योंकि उन्होंने उतना गहराई से नहीं देखा था.
ऊपर कोई नहीं था
जब गुलजार से पूछा गया कि क्या उस वक्त घर के ऊपर कोई व्यक्ति मौजूद था? तो उन्होंने साफ इनकार किया. गुलजार ने दावा किया, "ऊपर कोई व्यक्ति नहीं था. मैंने खुद ऋतिक को जीने (सीढ़ियों) से नीचे भागते हुए आते देखा था. उनकी बहन ने नीचे गेट खोलकर देखा था और जैसे ही उसने नीचे झांका, तो डर के मारे उसकी भी गिल्ली निकल गई (वह बेहद डर गई). इसके बाद मैंने खुद ऊपर जाकर देखा कि शायद कुछ अलग हुआ हो, लेकिन ऊपर कोई नहीं था."
'बहू के लिए गांव में स्कूल बनवा रहे थे ससुर'
पड़ोसी गुलजार चौधरी ने दोनों पति-पत्नी के संबंधों को लेकर भी कई बड़े दावे किए. उन्होंने कहा, "हमने कभी भी उनके घर से कोई लड़ाई-झगड़े की आवाज नहीं सुनी. ऋतिक बहुत अच्छा लड़का है और उसका व्यवहार भी बहुत अच्छा है." गुलजार ने आगे बताया कि दीपिका अक्सर घूंघट करके ही घर से बाहर निकलती थी और उनका किसी पड़ोसी के घर आना-जाना नहीं था. उन्होंने दीपिका का चेहरा पहली बार कल न्यूज़ चैनलों पर ही ठीक से देखा है.
गुलजार के मुताबिक, "लड़की ने बीएड (B.Ed) कर रखा था और बहुत पढ़ी-लिखी थी, जबकि लड़का उतना पढ़ा-लिखा नहीं है. बहू पढ़ी-लिखी आ गई थी, इसीलिए उसके ससुर (मनोज प्रधान) मौके पर अपनी जमीन पर दीपिका के लिए एक अच्छा स्कूल बनवा रहे थे. पहले वे स्कूल किराए पर चलवाते थे, लेकिन अब उसे हटवाकर दोबारा से अच्छे तरीके से स्कूल बनवा रहे थे ताकि उसकी मान्यता ली जा सके. यह बात पूरे मोहल्ले में चल रही थी."
गुलजार ने यह भी बताया कि वे खुद इस शादी में गए थे. लड़की वालों ने अपनी हैसियत से बहुत अच्छी शादी की थी और उनके पूरे परिवार व दोस्तों ने शादी में शिरकत की थी.
मायके पक्ष का आरोप- 1 करोड़ खर्च किए, फिर भी मांगी गाड़ी और दहेज
एक तरफ जहां पड़ोसी का यह बयान सामने आया है, वहीं दूसरी तरफ दीपिका के मायके वालों का आरोप बिल्कुल अलग और बेहद गंभीर है. मूल रूप से कुड़ी गांव की रहने वाली दीपिका की शादी करीब डेढ़ साल पहले जलपुरा के ऋतिक से हुई थी. परिवार का कहना है कि उन्होंने शादी में करीब 1 करोड़ से ज्यादा खर्च किए थे और अपनी हैसियत से बढ़कर दान-दहेज दिया था.
मायके पक्ष का आरोप है कि शुरुआती कुछ महीने सब कुछ ठीक रहने के बाद ससुराल वालों की मांगें बढ़ने लगीं. दीपिका को अतिरिक्त दहेज और गाड़ी के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा और उसके साथ कई बार मारपीट भी हुई. रिश्तों और समाज की दुहाई देकर दीपिका लंबे समय तक यह सब कुछ सहती रही और कई बार दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश भी हुई. लेकिन आखिरकार एक रात इस खौफनाक वारदात के बाद सब कुछ खत्म हो गया.
फिलहाल, इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पति ऋतिक और ससुर मनोज प्रधान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
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